पाली

जूना खेड़ा की मिट्टी में फसलों के साथ कोयले की जांच भी लखनऊ लैब में होगी

- पुरातत्व विभाग का उत्खनन कार्य  

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Feb 23, 2018

नाडोल. भारमल नदी के किनारे प्राचीन जूना खेड़ा की पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग जयपुर के उत्खनन खोज अधिकारी डॉ.विनित गोधल के निर्देशन में द्वितीय चरण में हो रही खुदाई के दौरान मिले अवशेषों से अधिकारी काफी उत्साहित है।

अब तक निकली मिट्टी का परीक्षण करने पहुंची बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान लखनऊ की टीम के डॉ.अनिल पोखरिया, राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर के डॉ.कृष्णपालसिंह देवड़ा ने यहां मिट्टी का वाटर फ्लोटेशन विधि से तीन दिन तक परीक्षण किया। इस मिट्टी में मिले अनाजों के साथ कोयला एवं अन्य अवशेषों की जांच लखनऊ की लैब में होगी।

उत्खनन खोज अधिकारी डॉ.विनित गोधल ने बताया कि 4 जनवरी से जूनाखड़ा की द्वितीय चरण की खुदाई में प्राप्त मिट्टी के परीक्षण में मिले अनाज में ज्वार, गेहूं, कुलथ के साथ कोयला एवं अन्य अवशेषों के चालीस नमूनों की लखनऊ की लैब में जांच के बाद वैज्ञानिक टीम द्वारा विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही उस समय के लोगों के खान-पान एवं रहन-सहन टाइम पीरियड के साथ इस स्थान के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

50 दिनो में मिले यह अवशेष

यहां चल रही द्वितीय चरण की खुदाई में मिट्टी की सुराही, हांडी, मिट्टी के बर्तन, तांबे के दो सल्तनत कालीन सिक्के, मणका, मोहरे, सीसे के सिक्के, मानव खोपड़ी, कुषाण काल की ईटें व भणके सहित कई अवशेष मिले हैं।

पूर्व में ये मिले थे अवशेष

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा 1991, 1992, 1993 व 1996 में उत्खनन करवाया गया था। इसके 20 साल बाद 2017 में 175 दिन उत्खनन कार्य करवाया गया था, जिसमें मानव कंकाल, चूल्हे, राख, मणके, मिट्टी के बर्तन के टुकड़े आयुर्वेद चिकित्सक खरत भट्टी के अवशेष, मकानो के अवशेष व कौड़ी आदि मिले थे।

ये कर रहे सहयोग

टीम में बांगड़ राजकीय संग्रहालय पाली के अध्यक्ष इमरान अली, वरिष्ठ प्रारूपकार रंजनीकांत वर्मा, प्रारूपकार सुनील सांखला, पोटरी सहायक जगदीश चन्द, मानाराम सीरवी मोकमपुरा, रतनसिहं बेड़ा, किस्तुरचन्द दादाई, सकाराम सीरवी शामिल है।

Published on:
23 Feb 2018 02:11 pm
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