पाली

Lockdown : अवधि समाप्त होने के चार दिन पहले ही हुआ विस्फोट, लोगों के हितों पर लगी चोट

- कैसे करें अब इंतजाम, जीवन की पटरी में लगा जाम
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May 01, 2020
Lockdown : अवधि समाप्त होने के चार दिन पहले ही हुआ विस्फोट, लोगों के हितों पर लगी चोट
Lockdown : अवधि समाप्त होने के चार दिन पहले ही हुआ विस्फोट, लोगों के हितों पर लगी चोट

पाली। पालीवासियों को तीन मई का बेसब्री से इंतजार था। मध्यम वर्गीय एवं निम्न वर्गीय लोगों को आस थी कि इस बार तीन मई को लॉकडाउन [ Lockdown ] खुल ही जाएगा। जैसे-जैसे तिथि नजदीक आ रही थी, लोगों के चेहरों पर सुकून दिखाई देने लगा था, लेकिन कहते हैं किस्मत के खेल निराले होते हैं और यही हुआ, चार दिन पहले ही बाजी ही पलट गई।

शहर में कोरोना पॉजिटिव [ Corona positive ] का आंकड़ा बढ़ते ही पूरे शहर में कर्फ्यू [ Curfew in Pali city ] लगा दिया गया है और लॉकडाउन को लेकर भी आशंका लोगों के चेहरों पर झलकने लग गई है। लोग जैसे-तैसे आस-पास के लोगों से कर्जा लेकर अपना काम चला रहे थे और तीन मई के बाद चुकाने का वादा भी कर रहे थे, लेकिन उनकी आस पर एकाएक तुषारापात हो गया। किस्मत ने ऐसा खेल दिखाया कि एक दिन में नौ कोरोना पॉजिटिव आ गए और पूरे शहर में हडक़ंप मच गया।

बढ़ रहा कर्जा, कैसे चुकाएंगे?
शहर में ऑप्टीकल का व्यवसाय करने वाले शंकरलाल पर्शवानी का कहना है कि लगातार दो महीने से व्यवसाय ठप है। इस बार तीन मई से लॉकडाउन खुलने के आसार थे और पाली में मरीज भी नहीं आ रहे थे तो आस बंधी थी, लेकिन एकाएक इतने मरीजों के मिलने के बाद तो लॉकडाउन बढऩे की आशंका को बल मिला है। हमने जैसे-तैसे दिन गुजारे और मित्रों से कर्जा लेकर घर की गाड़ी चलाई अब तो नहीं लगता कि लॉकडाउन खुल पाएगा। ऐसे में हमारे सामने तो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

हर दिन बीत रहा साल की तरह
टैक्सटाइल फैक्ट्री में फोल्डिंग का काम कर गुजारा करने वाले चैनाराम का कहना है कि हमारा गुजारा तो प्रतिदिन की मजदूरी से चलता था, लेकिन पिछले दो माह से घर पर बैठे हैं। आगे भी लॉकडाउन खुलने की आस नहीं है। ऐसे में घर चलाना भी मुश्किल हो गया। लोगों से उधार लिया है, पर चुकाना तो दूर अब और कैसे चलाएंगे? संकट खड़ा हो गया है।

पहले जीएसटी और अब कोरोना
निकटवर्ती उतवण में ज्वैलरी रिपेयरिंग का काम करने वाले कुंदनमल सोनी का कहना है कि पहले जीएसटी के कारण सोने-चांदी का व्यवसाय बंद रहा और अब कोरोना पीछा नहीं छोड़ रहा। ऐसे में परिवार पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। लोगों से कर्ज लेकर गुजारा कर रहे हैं। सरकार या प्रशासन की तरफ से भी मदद के लिए कोई नहीं आया है।

घर में जाम टैक्सी, रोजी-रोटी का संकट
गांधी कॉलोनी में टैक्सी चलाकर आजीविका चला रहे महेंद्र का कहना है कि दो महीने से ज्यादा समय से टैक्सी घर पर खड़ी है। लोगों ने उधार लिया और काम चलाया, पर अब तो उधार से भी जुगाड़ नहीं हा पा रहा। लॉकडाउन बढ़ गया तो फिर जिंदगी भी जाम हो जाएगी। घर चलाना भी अब तो मुश्किल हो गया है।

भाई का हर माह जोधपुर में होता है डायलिसिस
टैक्सी ड्राइवर महेंद्र का भाई गंभीर बीमारी का शिकार है और हर माह जोधपुर में डाललिसिस होता है। भामाशाह योजना बंद होने के कारण अब यह व्यवस्था भी निजी स्तर पर ही करनी पड़ रही है। सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है।

Published on:
01 May 2020 06:04 am