पाली शहर में भगवान राम का सजा है दरबार, गांधी मूर्ति से चादरवाला बालाजी तक तालाब के किनारे पग-पग पर विराजमान है राम भक्त हनुमान।
अयोध्या में भगवान राम मंदिर की 22 जनवरी को प्रतिष्ठा होने वाली है। इसकी खुशी में पूरा देश राममय हो गया है। पाली के तो प्राण ही प्रभु राम में बसते हैं। पाली में भोर की पहली किरण के धरती पर उतरने से पहले ही प्रभु राम व राम भक्त हनुमान का गुणगान शुरू होता है। सांझ ढले शयन का समय होने तक जय श्रीराम और जय हनुमान का स्वर ही गूंजता रहता है। पाली के पानी दरवाजा पर तो उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिमी हर दिशा में भगवान राम विराजमान है। वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति अवध बिहारी व रघुनाथ के दरबार में धोक लगाकर ही दिन की शुरुआत करता हैं। आज हम आपको पाली में विराजमान प्रभु राम के दर्शन कराने के साथ उनके परम भक्त हनुमान के मंदिरों की झलक दिखा रहे हैं, जो लाखोटिया के घाटों व उसके पास आस्था के बड़े केन्द्र हैं।
रघुनाथ मंदिर, पानी दरवाजा व्यंक्टेश मार्ग
माहेश्वरी समाज का रघुनाथ मंदिर शहर की आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है। समाज महामंत्री भुवनेश काबरा बताते हैं कि यह मंदिर 300 सालों से भी अधिक पुराना है। आजादी से पहले वर्ष 1925 में राज दरबार के समय इसका पट्टा जारी किया गया था। इस मंदिर में भगवान राम व सीता विराजमान है। भगवान की प्रतिमाएं धातु की बनी है। उनके सामने ही प्रभु हनुमान भी विरामान है। मंदिर में पातालेश्वर महादेव का धाम है।
रघुनाथ मंदिर, सिरे घाट के सामने
पाली के मेलों का स्थल रहा पानी दरवाजा पर सिरे घाट के सामने ब्राह्मण स्वर्णकार समाज का रघुनाथ मंदिर है। समाज अध्यक्ष अध्यक्ष रामचन्द्र महेचा ने बताया कि यह मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना है। यहां के पुजारी जगदीश दवे ने बताया कि बताते हैं कि करीब 80 वर्ष से पूजन कर रहे है। मंदिर में भगवान राम, सीता की पंचधातु की बनी प्रतिमा है। उनके साथ ही भगवान कृष्ण और गणपति भी विराजमान है।
अवध बिहारी मंदिर, सिरेघाट
सिरेघाट के एकदम सामने ही अवध-बिहारी मंदिर है। वैष्णव रामावत समाज पंचायत के इस मंदिर के बारे में पंचायत संरक्षक श्रीराम वैष्णव बताते हैं कि मंदिर का निर्माण करीब 50 साल पहले करवाया गया था। मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान की संगमरमर की प्रतिमा है। जिसकी छवि देखते ही हर व्यक्ति के मन में आस्था का भाव स्वत: जागृत हो जाता है।
खाकी चौक बालाजी लेते हैं आशीर्वाद
सिरे घाट पर ही खाकी चौक बालाजी का मंदिर है। जो सामने विराजमान भगवान राम व सीता से आशीर्वाद लेते हुए लगते हैं। यहां भी भगवान राम व सीमा की प्रतिमाएं धातु की बनी है। यह मंदिर कब से यहां स्थापित है, इसकी पुख्ता जानकारी तो नहीं है, लेकिन यह मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
अग्रवालों की बगेची में भी प्रभु राम
लाखोटिया तालाब के किनारे पर ही शहर के अग्रवालों की बगेची में भी भगवान राम व सीता के साथ प्रभु के भक्त हनुमान विराजमान है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की चलित प्रतिमा भी है। समाज के पूर्व अध्यक्ष मदनमोहन गुप्ता बताते है कि यह मंदिर 150 साल से भी अधिक पुराना है। मंदिर में भगवान राम व सीता की अष्ट धातु से बनी प्रतिमाएं है। ये मंदिर सभी की आस्था का केन्द्र है।
लाखोटिया के घाटों व पास में पग-पग पर बालाजी के मंदिर
पंचमुखी बालाजी मंदिर शिववाड़ी
दादु विजय हनुमान मंदिर, भैरूघाट
बालाजी मंदिर, लाखोटिया उद्यान
खाकी चौक बालाजी
मुनि पुरी घाट पर बालाजी के दो मंदिर
नृसिंह भगवान मंदिर में भगवान हनुमान
काबली मंदिर में भी विराजमान है राम भक्त
महेश वाटिका में हनुमान मंदिर
पाल बालाजी पर हनुमान मंदिर
चादरवाला बालाजी मंदिर
(ये मंदिर तो पाली के सरोवर लाखोटिया के घाटों और उनके पास िस्थत है। इसके अलावा भी यहां पर कई मंदिर भगवान राम के भक्त हनुमान के साथ देवी-देवताओं के हैं, जो जन-जन की आस्था के केन्द्र बने हुए हैं।)