Rajasthan News: थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों के लिए थैलेसीमिया सोसायटी की ओर से रक्तदान शिविर लगाकर रक्त एकत्रित करने का जतन किया जा रहा है।
Rajasthan News: दानवीरों का क्षेत्र पाली। जहां लोग धन के साथ देह तक दान करने में आगे रहते है। वहां इन दिनों रक्त की कमी खल रही है। खून की कमी से सबसे ज्यादा खतरा बढ़ा है, उन बच्चों में, जिनको हर पन्द्रह-बीस दिन में रक्त बदलवाना पड़ता है, यानि थैलेसीमिया के पीड़ित है। हालात यह है कि रक्त की जरूरत पड़ने पर रक्तदाताओं को फोन कर बुलाना पड़ रहा है। उनके आने में थोड़ी देरी हो जाए या वे शहर से बाहर है तो मरीज की जान पर बन आने का खतरा रहता है।
पाली के बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में मंगलवार सुबह केवल 53 यूनिट रक्त उपलब्ध था। इसमें भी कुछ ग्रुप का खून नहीं था, जबकि बांगड़ चिकित्सालय व शहर में ही रोजाना औसत 35-40 यूनिट रक्त की जरूरत रहती है। जो प्रसूताओं के साथ अन्य मरीजों के उपयोग में आता है।
पाली में थैलेसीमिया से ग्रसित वैसे तो करीब 74 बच्चे हैं। उनमें से 65 बच्चों को हर पन्द्रह से बीस दिन के अंतराल पर खून बदलवाने के लिए बांगड़ चिकित्सालय आना पड़ता है। उनके लिए ब्लड बैंक में रक्त भी रखा जाता है, लेकिन इन दिनों कमी से परेशानी हो रही है।
अस्पताल में एक मरीज को रक्त की जरूरत पड़ी, लेकिन ब्लड बैंक में एबी प्लस खून नहीं था। मेहबूब कबाड़ी ने बताया कि इस पर आकांक्षा जांगिड़ से सम्पर्क किया। वे घर पर अपना जन्मदिन मना रहीं थीं। रक्त की जरूरत सुनकर पिता प्रेमकुमार व मां पुष्पा देवी के साथ आकर रक्तदान किया।
ब्लड बैंक में रक्त की अधिक कमी नहीं है। रक्त यूनिट में उतार-चढ़ाव तो चलता रहता है। हम रक्त की आवश्यकता को पूरा करवा रहे हैं। अभी रक्त की जरूरत ज्यादा पड़ रही है।
डॉ. मांगीलाल सीरवी, प्रभारी, ब्लड बैंक, पाली
हम रक्तदान शिविर लगवा रहे हैं, जिससे थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों के लिए रक्त की कमी नहीं हो। गर्मी में रक्त की कमी आती है।
काजल शर्मा, सचिव, थैलेसीमिया सोसायटी, पाली