
पाली/बाबरा। जिले के बाबरा क्षेत्र में रबी की फसल की बुवाई [ Rabi crop sowing ] के लिए किसान अपने खेतों में जुटे हुए हैं। इसके लिए कृषि विभाग [ agriculture department ] गेंहू की बुवाई के लिए दिसम्बर के दूसरे सप्ताह तक समय उपयुक्त बता रहा है। क्षेत्र में इस बार मानसून की अच्छी वर्षा होने से सालों बाद कुओं में पानी की पर्याप्त आवक हुई है। इसके लिए क्षेत्र के किसान खाद्यान्न फसलों की बुवाई के प्रति उत्सुक है, लेकिन इसके ठीक उलट में किसानों के लिए सबसे बेहतर कहे जाने वाली जीरे की फसल की बुवाई के प्रति किसानों का रुझान इस बार घटा है। इसके लिए वर्षा के दिनों में वृद्धि, लगातार बादलों की आवाजाही व नमी युक्त वातावरण इस बार पूरे नवम्बर माह तक बना रहने से किसानों ने अपने खेतों में जीरे की बुवाई [ Cumin seeds ] के प्रति कम रुचि ली है।
संवेदनशील फसल है जीरा
जीरे की फसल सबसे संवेदनशील फसल की श्रेणी में शुमार है। पल-पल बदलते मौसम के साथ इस वर्ष मानूसन विदा होने के बावजूद नवम्बर माह तक बादल व वर्षा योग बने रहने से जीरे की बुवाई प्रभावित हुई है। किसानों ने बताया कि जीरे की फसल में इस बाद लगातार बदल रहे मौसम से जीरे में रोगग्रस्त होकर नुकसान रहने की आशंका अधिक रहती है। इससे जीरे की बुवाई के प्रति रुचि नहीं के बराबर है।
खाद्यान फसल की बुवाई जोरों पर
क्षेत्र में वर्षों बाद कभी सूने रहने वाले खेतों के जाव में इन दिनों किसान रबी में गेंहू की फसल बुवाई में जुटे हुए हैं। गेंहू की बुवाई का सीजन अभी जारी है। इसके लिए किसानों का फोकस इस बार गेंहू, जौ, चना जैसी खाद्यान फसल बुवाई पर ज्यादा है। इससे खाद्यान फसल बुवाई का रकबा बढऩे की उम्मीद ज्यादा है। कृषि विभाग जौ व गेंहू की बुवाई के लिए अभी तक अनुकूल परिस्थितियां बता रहा है। इससे खाद्यान्न फसलों की बुवाई का रकबा और बढऩे की उम्मीद है।
(वर्ष 2019 में 27 नवम्बर तक हुई बुवाई)
रायड़ा, राई, सरसों, तारामीरा - 160 हेक्टेयर
जौ 300 हेक्टेयर
गेंहू 800 हेक्टेयर
चना 200 हेक्टेयर
जीरा 140 हेक्टेयर
इसबगोल 120 हेक्टेयर
रिजका घास 50 हेक्टेयर
मैथी 70 हेक्टेयर
हरी सब्जियां 20 हेक्टेयर
(स्रोत कृषि विभाग - बाबरा, प्रतापगढ़, रातडिय़ा व सुमेल पंचायत के आंकड़े)
इनका कहना...
ये बात सही है कि इस बार नवम्बर महिने में भी बादलों के छाए रहने के क्रम के साथ हवा में अधिक नमी होने से किसानों ने जीरे की फसल की बुवाई के प्रति कम रुचि ली है। ज्यादा नमी युक्त वातावरण जीरे की फसल के लिए अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। इस बार किसान खाद्यान्न फसलों की बुवाई को अधिक जवज्जों दे रहे हैं। इससे गेंहू व जौ की बुवाई पिछले कुछ वर्षो के मुकाबले इस बार अब तक अधिक बुवाई हो चुकी है। रबी फसल में गेंहू व जौ की बुवाई का अभी पर्याप्त समय है। -रामसिंह राठौड़, कार्यवाहक कृषि पर्यवेक्षक, बाबरा