
सेंदड़ा के निकट जंगल में बकरियां चरा रही एक वृद्धा की चंद रोज पहले आदमखोर युवक ने हत्या कर दी थी और उसका मांस नोंच-नोंच कर खाया था। ऐसा ही खतरा अब पूरे जिले में मंडरा रहा है। जिले में पिछले पांच माह में पांच हजार से अधिक लोग कुत्तों के शिकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं, जिले के सबसे बड़े बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में ही जनवरी से अब तक करीब 1700 लोग श्वानों के काटने के बाद रेबीज का टीका लगवाने पहुंच चुके है। लेकिन, नगर परिषद है कि न तो कुत्तों को पकड़ने के लिए कुछ कदम उठा रही है और न ही उनकी नसबंदी के लिए कोई उपाय कर रही है। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
इतने लोग हुए शिकार
जनवरी - 410
फरवरी- 345
मार्च- 345
अप्रेल- 280
मई - 325
बुजुर्ग व बच्चे सॉफ्ट टारगेट
शहर व गांवों की हर गली में पांच से सात श्वान घूमते दिख जाते हैं। पशु चिकित्साधिकारियों की माने तो श्वान बुजुगोZं व बच्चों पर अधिक हमला करते है। बुजुर्ग विजयकुमार ने बताया कि वाहन चलाते समय कई बार श्वान पीछे भागते हैं। शहरवासी संजय सोनी का कहना है कि श्वान घरों तक में घुस जाते हैं। इसके बावजूद नगर परिषद श्वानों को नहीं पकड़ रही है।
कोई भी इलाका नहीं सुरक्षित
शहर के हर क्षेत्र में श्वानों के काटने की घटनाएं हो चुकी है। बजरंग बाड़ी, इंद्रा कॉलोनी, राजेन्द्र नगर, हैदर कॉलोनी, नया बस स्टैण्ड, केशव नगर, रामलीला मैदान, सवोZदय नगर में तो श्वानों ने एक ही बार में दो-तीन जनों को एक ही दिन में काटा है। पीडि़तों को तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज करवाना पड़ा।
श्वान काटने पर यह करें
-घबराएं नहीं
-काटने वाली जगह को साफ करें
-घाव को साफ कपड़े या रूई से पौंछने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं
-अस्पताल पहुंचे, जहां रेबीज का इंजेक्शन लगवाएं
राजस्थान में डॉग बाइट के साल दर साल आंकडे
वर्ष- डॉग बाइट के मामले
2019- 450558
2020- 324500
2021- 113976
2022- 78814 (नवंबर महीने तक)
हर पांच साल में होती गणना
(राजस्थान में श्वानों की संख्या)
वर्ष 2012- 11 लाख 51 हजार 015
2019- 12 लाख 75 हजार 596