14 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान: मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे का ट्रांसफर 24 घंटे में निरस्त, जालोर की जगह सुमेरपुर में ही रहेंगे यथावत

Deepak Kumar Kumawat Transfer Cancelled: आईटी एवं संचार विभाग के सहायक प्रोग्रामरों के तबादला आदेश में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमार कुमावत का सुमेरपुर से जालोर ट्रांसफर किया गया था। अगले ही दिन संशोधित आदेश जारी कर तबादला निरस्त कर दिया गया। मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
2 min read
Google source verification

पाली

image

Arvind Rao

Jul 14, 2026

Deepak Kumar Kumawat Transfer Cancelled

Deepak Kumar Kumawat Transfer Cancelled (Patrika File Photo)

Rajasthan Transfer Cancelled: पाली: राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक नया विवाद सामने आया है। राज्य सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा जारी किए गए सहायक प्रोग्रामरों के तबादला आदेशों में एक चौंकाने वाला संशोधन देखने को मिला है। कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमार कुमावत का तबादला आदेश जारी होने के महज 24 घंटे के भीतर ही निरस्त कर दिया गया, जिसे लेकर अब प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक सवाल उठने लगे हैं।

24 घंटे में बदला फैसला

मामला राजस्थान कंप्यूटर राज्य, अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा संवर्ग का है। तकनीकी निदेशक एवं संयुक्त सचिव रामेश्वर लाल सोलंकी की ओर से 8 जुलाई को एक सूची जारी की गई थी, जिसमें पाली की सुमेरपुर पंचायत समिति में कार्यरत सहायक प्रोग्रामर दीपक कुमार कुमावत का स्थानांतरण जालोर पंचायत समिति में कर दिया गया था।

लेकिन इसके तुरंत बाद, 9 जुलाई को विभाग ने एक संशोधित आदेश जारी किया। इस नए आदेश में दीपक कुमावत का नाम हटाते हुए उनका तबादला निरस्त कर दिया गया और उन्हें सुमेरपुर में ही यथावत पदस्थापित रहने के निर्देश दिए गए।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया और उठे सवाल

मंत्री के बेटे का ट्रांसफर 24 घंटे में कैंसिल होने की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सरकार को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। कई लोगों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और रसूखदारों के लिए 'दोहरे मापदंड' अपनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

जहां आम जनता और कर्मचारियों का एक धड़ा इसे राजनीतिक दबाव का नतीजा मान रहा है। वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि यह विभाग की सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, विभाग ने इस यू-टर्न को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।

कर्मचारियों में असंतोष

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने हाल ही में विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए हैं। इस व्यापक फेरबदल के बाद से ही कई कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों में अपने ट्रांसफर को लेकर गहरा असंतोष है। सैकड़ों कर्मचारी अपनी आपत्तियां और शिकायतें दर्ज करा चुके हैं।

ऐसे में आम कर्मचारियों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि जब एक आम कर्मचारी के जायज विरोध की सुनवाई नहीं हो रही। वहीं, मंत्री के बेटे का तबादला रातों-रात कैसे रोक दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की तबादला नीति पर एक बार फिर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।