पाली

VIDEO : एक सेल्यूट तो इनके लिए भी बनता है…

- गांवों से अब भी शहर में घर-घर दूध पहुंचा रहे दूधिए- परिस्थितियां हैं, इसलिए उधारी पर ही नियमित सप्लाई
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Apr 14, 2020
VIDEO : एक सेल्यूट तो इनके लिए भी बनता है...
VIDEO : एक सेल्यूट तो इनके लिए भी बनता है...

पाली। बीस किलोमीटर गांव से रोज नियमित दूध लेकर पहुंच रहे दूधिए, विकट परिस्थितियों में भी शहरवासियों के लिए दूध की आपूर्ति करवा रहे हैं। रोज सुबह चार बजे उठकर गांव के घर-घर से दूध एकत्रित करना और शहर में ग्यारह बजे तक सप्लाई करना फिर घर जाकर थोड़ी देर आराम करना और फिर शाम के दूध की सप्लाई [ Milk supply ] की तैयारी करना। कई बार रास्ते में वाहन का जवाब दे देना तो कई बार पुलिस की टोकाटोकी के बीच भी नियमित दूध की आपूर्ति करना। यही जीवनक्रम बन गया है दूधियों का।

शहर में तीस से चालीस लोग अपने वाहनों से शहर आते हैं नियमित रूप से दूध की आपूर्ति करते हैं। हालांकि कई लोग डेयरी से भी दूध खरीदते हैं और डेयरी के वाहन भी घर-घर सप्लाई के लिए आने लगे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद इन दूधियों की खुद की जान जोखिम में डालकर सेवा देने का जज्बा किसी तपस्या से कम नहीं है। आज जबकि कर्मवीर सेवा के जज्बे से लोगों की सहायता कर रहे हैं और लोग भी इनकी सेवाओं का सम्मान कर रहे हैं। ऐसे समय में एक सेल्यूट तो इनके लिए भी बनता है।

पुराने ग्राहक, इन्हें मुश्किल में छोड़ नहीं सकते
पास के गांव धर्मधारी से दूध लेकर नियमित आपूर्ति करवा रहे जगदीशसिंह राजपुरोहित का कहना है कि लोगों के वेतन भी नहीं आए हैं। कई लोग फैक्ट्रियों व निजी कार्यों में संलग्न है और पुराने ग्राहक हैं। कुछ लोगों ने पैसे दिए हैं। बाकी तो वेतन आने पर ही दे पाएंगे। कई लोगों के दो महीने के पैसे ऊपर चढ़ गए हैं। इन्हें मना कैसे कर सकते हैं। कई बार लोगों की परिस्थितियों को भी समझना पड़ता है। पैसे कहीं जाने वाले थोड़े ही है। मुश्किल परिस्थितियों में भी तकाजा करेंगे तो फिर रिश्तों का क्या होगा।

आज कई ग्राहक 15-20 साल से नियमित दूध ले रहे हैं। कई बार चुकारा नहीं हो पाता तो कई बार आवश्यकता पडऩे पर अधिक राशि भी दे देते हैं। परिस्थितियां आज है, कल नहीं, पर संबंध तो हमेशा ही रहेंगे। रामदेव रोड से नियमित साइकिल पर दूध आपूर्ति करने वाले प्रवीण पटेल का कहना है कि ग्राहक बंधे बंधाए हैं। ऐसी परिस्थितियों में घर में ही तो नहीं बैठा जा सकता। हां दूध दूर ही देना और बार-बार हाथ धोने का ध्यान जरूर रखते हैं। हमारा काम तो सुबह चार बजे से ही शुरू हो जाता है और रात में भी दस-ग्यारह तक जारी रहता है।

Published on:
14 Apr 2020 07:04 am