पाली

‘संकट’ में भी नहीं एक साथ, तर्क-वितर्क से बैठक बेनतीजा

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Feb 03, 2019
संकट’ में भी नहीं एक साथ, तर्क-वितर्क से बैठक बेनतीजा
संकट’ में भी नहीं एक साथ, तर्क-वितर्क से बैठक बेनतीजा

किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सके उद्यमी और प्रशासनिक अधिकारी, 1 मार्च तक एनजीटी में पेश करनी है रिपोर्ट
पाली. एनजीटी की पिछली सुनवाई में तल्ख टिप्पणी और जुर्माना लगाने के बाद इण्डस्ट्री बंद होने का संकट गहरा गया है। प्रदूषण का समाधान निकालने, एनजीटी की ओर से मांगी गई रिपोर्टों और बांडी नदी में कैसे एक बूंद पानी नहीं जाए। इसका प्लान बनाने को लेकर जिला कलक्टर की उपस्थिति में शनिवार को बैठक हुई। इसमें सीइटीपी के पूर्व पदाधिकारियों व वर्तमान पदाधिकारियों के साथ उद्यमियों में तर्क-वितर्क के बाद बैठक बेनतीजा ही समाप्त हो गई। हुआ सिर्फ इतना कि एक बार फिर नई तकनीक के बारे में बताया गया। जो आज भारत में किसी जगह पर नहीं है। इधर, प्रशासन की ओर से इडस्ट्री के संकट को लेकर विशेष कुछ नहीं किया गया। महज एनजीटी की ओर से विभिन्न विभागों से मांगी रिपोर्ट 15 दिन में देने के निर्देश ही दिए गए।

जेडएलडी पर नहीं बन पाई सहमति
एनजीटी ने सीइटीपी से प्लांट छह में जेडएलडी की अनिवार्यता के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बैठक में उद्यमी इसकी तरफ बढऩे को लेकर कोई निर्णय नहीं कर सके। वर्तमान बोर्ड के साथ एसोसिएशनों व पूर्व सीइटीपी के कई पदाधिकारियों का कहना था कि जेडएलडी होने पर इंडस्ट्री नहीं चला पाएंगे। इससे कपड़े की लागत बढ़ जाएगी। इसके अलावा पाइप लाइन का विकल्प भी सामने आया, लेकिन सहमति इस पर भी नहीं बनी। बैठक में उपखण्ड अधिकारी रोहिताशसिंह तोमर, सीइटीपी सचिव अशोक लोढ़ा, उपाध्यक्ष कमलेश जैन, पूर्व अध्यक्ष अनिल मेहता, प्रमोद लसोड़, सुरेश राजाराम, अरुण जैन मौजूद थे।


न्यूक्लियर पर आधारित तकनीक
प्रदूषित पानी को ट्रीट करने की यह तकनीक न्यूक्लियर बेस है। इसमें 15 हजार डिग्री के तापमान मशीन में बनाया जाएगा। इसके बाद प्रदूषित स्लज तक जल जाएगी। इससे निकलने वाली गैस से बिजली बनाई जाएगी।


रूस की कम्पनी ने दिया प्रजेंटेशन
जेडएलडी की लागत करीब 100 करोड़ रुपए आ रही है। इसके बाद भी इसके सफल होने को लेकर असमंजस है। इधर, एक बार फिर रूस की एक कम्पनी ने नई तकनीक का प्रदर्शन किया। इसके लिए सीइटीपी की शाम को फिर से बैठक हुई। इसमें रूस व इजराइल में इस तकनीक के सफल होने का दावा करते हुए कम्पनी के लोगों ने यहां तक ऑफर दिया कि यदि कम्पनी पानी ट्रीट करने में फेल हो गई तो 15 करोड़ की पेनल्टी तक दे देगी। इस नई तकनीक को लगाने का खर्च 75 करोड़ रुपए बताया गया है।

इन विभागों को यह देनी है रिपोर्ट

परिवहन विभाग : टैंकरों से परिवहन होने वाले पानी की
चिकित्सा विभाग : गांवों में शिविर लगाकर पता लगाएंगे कि प्रदूषण से मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है।
कृषि : पिछले दस वर्ष में फसल बढ़ी या घटी, कृषि भूमि पर क्या प्रभाव पड़ा।
भू जल : दस वर्ष में भूजल की क्या स्थिति है। पहले कैसा था व अब कैसा है।
सिंचाई विभाग : कुओं का पानी अब कैसा है और पहले कैसा था। इसमें दस वर्ष में क्या बदलाव आया।
रीको : नालों की सफाई और स्लज को लेकर रिपोर्ट देगा। इण्डस्ट्री के बाहर कचरा तो नहीं जल रहा।
नगर परिषद : सीवरेज प्लांट से निकलने वाले पानी को बैक्ट्रिया खत्म कर क्लोरिनिकेशन करेगा। यह पानी इंडस्ट्री में काम आ सकता है या नहीं यह भी बताना होगा।
सीइटीपी- प्लांट को अपग्रेड कर जीरो डिस्चार्ज पर कब तक ले जा सकते हैं।
(यह रिपोर्ट 15 दिन में देनी है और हर सात दिन में इसे लेकर बैठक होगी। सभी विभाग प्रमुख सचिव को रिपोर्ट देंगे वे कोर्ट में पेश करेंगे। )

पिछली कांग्रेस सरकार में यह भी सुझाया गया था विकल्प
पिछली कांग्रेस सरकार में एक अन्य विकल्प भी प्रदूषण की समस्या का बताया गया था। इस बारे में सीइटीपी के उपाध्यक्ष कमलेश जैन ने बताया कि पाली, बालोतरा व जोधपुर की इंडस्ट्री के प्रदूषित पानी को पचपदरा ले जाकर रिफाइनरी में काम में लिया जा सकता है। इसकी स्लज भी पेट्रोलियम उत्पादों के साथ ऊर्जा बनाने में उपयोग की जा सकती है।


उद्यमियों से ली जाएगी राशि
एनजीटी ने सीइटपी पर 1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस पर भी बैठक में चर्चा की गई। इसमें तय किया गया कि उद्यमियों से राशि लेकर यह राशि जमा करवाई जाएगी।

कैसे कर सकते हैं पानी को री-साइकिल
सभी विभागों, सीइटीपी व पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से एनजीटी की ओर से मांगी रिपोर्ट समय पर देने को कहा है। पानी को री-साइकिल कैसे कर सकते हैं। उसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। इसकी भी रिपोर्ट मांगी है। इसे लेकर उद्यमी पैनल बना रहे हैं।
दिनेशचंद जैन, जिला कलक्टर, पाली


पाइप लाइन डाल सकते हैं
जेएडएलडी पूरी दुनिया में कही भी सफल नहीं हुई है। बांग्लादेश, चाइना, पाकिस्तान व भारत में ही इसे अपनाया गया है। समुद्र के मानकों के हिसाब से पानी डिस्चार्ज करने की स्वीकृति मिलने पर पाइप लाइन डालकर पानी समुद्र तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रवीण कोठारी, अध्यक्ष, सीइटीपी

इधर, किसानों ने जैतपुर में की बैठक
पाली . किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के तत्वावधान में जैतपुर में किसानों की बैठक हुई। इसमें एनजीटी के निर्णय को लेकर मंथन किया गया। समिति महामंत्री महावीरसिंह सुकरलाई ने किसानों को जांच के लिए आने वाले विभागीय दलों को वास्तविक जानकारी देने को कहा। उनका कहना था कि सीइटीपी प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है और नियमों का पालन नहीं करता है। इसक खामियाजा ही किसानों को भुगतना पड़ा है। इस अवसर पर समिति के गंगादान चारण, अमराराम पटेल, गिरधारीराम सारी की ढाणी, नाथुदान गढ़वाड़ा, लक्ष्मणराम भूरिया, गिरधारीसिंह धोलेरिया शासन, वागाराम विश्नोई, अर्जुनसिंह जैतपुर आदि उपस्थित थे।

Published on:
03 Feb 2019 07:05 am