पाली

Food Safety: लोगों की सेहत हो रही खराब, जांच करने वाले फेल

जिले में रोजाना महज 2 नमूनों की जांच भी नहीं, खाद्य सुरक्षा के तहत पिछले साल पाली में लिए गए 552 नमूने अमानक व मिसब्रांड नमूने मिले 97, अनसेफ मिले नमूने 9

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Mar 15, 2024
Food Safety: लोगों की सेहत हो रही खराब, जांच करने वाले फेल

आप कैसा भोजन कर रहे हैं। वह सेहत के लिए सुरक्षित है या नहीं। खाद्य सामग्री अमानक तो नहीं है। इसका पता पाली में कम ही लगता है। इसकी पुष्टि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य विभाग के आंकड़े भी बयां करते है। विभाग की ओर से जनवरी 2023 से लेकर 31 दिसम्बर तक महज करीब 550 नमूनों की जांच की गई। जिसका अर्थ है रोजाना महज 1.50 नमूने लेकर जांच की गई। इनमें से करीब 97 नमूने अमानक, मिसब्रांड मिले। वहीं करीब 10 नमूने तो अनसेफ मिले। जो यह बताने के लिए काफी है कि जिले की कई दुकानों व खाद्य स्थलों पर मिल रही सामग्री खाने योग्य नहीं है। हालात यह है कि दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल आदि में मिलने वाली सामग्री की तो जांच हो जाती है, लेकिन थडि़यों पर बिकने वाली सामग्री देखी तक नहीं जाती है।

यह बताई जा रही परेशानी

पाली में खाद्य सुरक्षा के तहत खाद्य पदार्थों के जांच के लिए पहले कुछ समय पहले तक महज एक फूड इंस्पेक्टर थे। जो जांच करने जाते थे। उनको अमानक, मिसब्रांड या अनसेफ मिले नमूनों पर कार्रवाई के तहत न्यायालय आदि में भी जाना पड़ता था। ऐसे में नमूने कम लिए जाते रहे है।
प्रदेश में चल रहा अभियान

पाली में खाद्य पदार्थों के कम नमूने लेने की यह िस्थति उस समय है, जब प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चल रहा है। इसमे भी अधिक नमूने त्योहारी सीजन में लिए जाते है। अभी जिले में शुद्ध आहार-मिलावट पर वार अभियान चल रहा है। एक मोबाइल यूनिट से भी नमूनों की जांच करवाई जा रही है।
बाहर भेजने पड़ते है नमूने

खाद्य पदार्थों के नमूने जांचने के लिए पाली से बाहर भेजे जाते है। इससे जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। जिन नमूनों पर आपत्ति आती है, उनकी जांच प्रदेश के बाहर मैसूर व पूना में करवाई जाती है। यह रिपोर्ट आने में भी काफी समय लग जाता है। उस समय तक व्यापारी खाद्य सामग्री बेचते रहते हैं।
कई लोगों ने नहीं लाइसेंस

खाद्य सामग्री बनाने व बेचने के लिए फूड लाइसेंस लेना होता है। यह लाइसेंस जिले में कई विक्रेताओं व निर्माताओं की ओर से नहीं लिया गया है। हालांकि उनको अब लाइसेंस बनवाने के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन लाइसेंस के बिना बिकने वाली सामग्री पर रोक नहीं है।
इनका कहना है

जो खाद्य पदार्थ अवधि पार या खराब मिलते है, उनको मौके पर नष्ट करवाया जाता है। अब नमूने लेने व उनकी जांच कराने में तेजी लाई जाएगी। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (एमएफटीएल) से भी जांच करवाई जा रही है। मिलावटखोरों के विरूद्ध खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006, विनियम 2011 के तहत निरीक्षण, नमूनीकरण, सर्विलेंस, जब्ती, नष्टीकरण की कार्रवाई की जाती है।
डॉ. विकास मारवाल, सीएमएचओ, पाली

Published on:
15 Mar 2024 09:55 am
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