राजस्थान के पाली जिले में दुनिया का पहला ओम की आकृति वाला शिव मंदिर बनकर तैयार हुआ है, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा सोमवार को ( 19 फरवरी) सीएम भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में हुई।
पाली। राजस्थान के पाली जिले में दुनिया का पहला ओम की आकृति वाला शिव मंदिर बनकर तैयार हुआ है, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा आज सीएम भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में हुई। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद लोगों को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि मैं यहां आकर गौरवांवित महसूस कर रहा हूं।
उन्होंने कहा कि यह विश्व का पहला ओमकार आकृति का मंदिर है, जो प्रदेश वासियों के सहयोग से राजस्थान में निर्मित होने का गौरव पाया है। उन्होंने इस मंदिर में दिए हजारों भक्तों के योगदान की सराहना की और उनका अभिनंदन किया।
सीएम ने पीएम मोदी की सराहना करते हुए कहा कि आज अगर भारत विश्व गुरु कहलाता है तो इसका श्रेय हमारे पीएम को जाता है। जिन्होंने विगत दस वर्षों में देश की संस्कृति व विरासत को दोबारा से पुर्णजिवित करने का सराहनीय प्रयास किया है।
सीएम ने अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि देशवासियों का वर्षों पुराना सपना अगर पुरा हुआ है तो इसमें पीएम मोदी का योगदान अहम रहा। पीएम ने सनातन धर्म परंपरा को न केवल देश में दोबारा से जीवित करने में अहम भूमिका निभाई बल्कि पूरी दुनिया में पहचान देने व निखारने का काम किया।
उन्होंने कहा कि हमारे देश ने एक ऐसा भी दौर देखा जब हमारी संस्कृति और विरासत को नष्ट और मिटाने का काम किया गया। हमारी सरकार ने इसे पुन: स्थापित करने का काम किया है। सीएम ने पिछले दिनों हुए जल-बंटवारा समझौता का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने जल समझौता विवाद को हल किया, जिसके प्रदेश के बड़े हिस्से को पानी की समस्या से निजात मिलेगी।
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने जो प्रेदशवासियों से वादे किए हैं वो सभी पूरे किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि एक-एक कर आपके विश्वास को पूरा करेंगे।
मंदिर की खास बातें
गौरतलब है कि पाली के जाडन में साल 1995 से पहले ॐ आकार के योग मंदिर बनाने की शुरूआत की गई थी। ॐ आकार का 4 मंजिला शिव मंदिर करीब 250 एकड़ में बनाया गया है। इस मंदिर में कुल 108 पिलर्स हैं। शिव नाम की 1008 प्रतिमाएं और 108 कक्ष बनाए गए है।
शिव मंदिर के साथ ही यहां 7 ऋषियों की भी समाधि है। 135 फीट ऊंचा मंदिर का शिखर है जिसके सबसे ऊपर वाले हिस्से में शिवलिंग स्थापित है और इस पर ब्रह्मांड की आकृति उकेरी गई है। इस मंदिर के निर्माण का सपना श्री अलखपुरी सिद्धपीठ परंपरा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महेश्वरानंद महाराज ने देखा था।
मंदिर को बनाने में धौलपुर के बंसी पहाड़पुर के लाल पत्थर इस्तेमाल किया गया है। आज 19 फरवरी को इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई है।