पर्यावरण को बेहतर करने के साथ आगे बढ़ रहे युवा
राजीव दवे
कपड़ा नगरी पाली, जहां रंगाई-छपाई का कार्य सालों पहले घरों से शुरू हुआ और पॉवर प्रोसेस तक पहुंचा। इस दौर तक आने में पीढि़यां बदली, अब युवाओं की नई सोच के साथ यह उद्योग करवट ले रहा है। परम्परागतसाड़ी को छोड़कर युवा उद्यमी गारमेंटिंग की तरफ बढ़ गए हैं। जिले व प्रदेश के बाहर के बजाय स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण मिटाने में नवचार ला रहे हैं। नए उद्यमियों की नई सोच व समझ का असर यह है कि पाली में बनने वाले सूट आज सूरत सहित देश के अन्य भागों में बनने वाले गारमेंट को टक्कर दे रहे हैं। वे नाम से बिक रहे है। ये बदलाव स्टार्टअप की चाह रखने वालों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।
पांच साल पहले उद्योग में आने पर ईटीपी संभाला है। उसमेएमवीआर तकनीक का उपयोग किया। जिससे प्रदूषित पानी को बहुत कम लागत पर साफ कर सके। अन्य तकनीक का भी उपयोग किया। जिससे पर्यावरण संरक्षण हुआ। गारमेंटिंग में बाजार के अनुसार बदलाव किए।
प्रांजुल गोगड़, युवा उद्यमी
गारमेंट का चलन बढ़ने से इस दिशा में कदम बढ़ाए। इसके लिए हमने एक कलर की 18 डिजाइन छापने वाली मशीन लगाई। क्वालिटी को लेकर एक्सपोर्ट यूनिट रखी। कपड़े को तीन स्तर पर जांच के बाद बाजार में उतार रहे है। स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे है।
मुदित समदडि़या, युवा उद्यमी
नवाचार व प्रौद्योगिकी : आधुनिक उपकरणों व तकनीक को अपनाया। जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरा उतरने वाला फ्रेबिक्स तैयार करने के लिए हर स्तर पर जांच करते हैं।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशील: युवा पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील है। पानी की रीसाइक्लिंग, जल संरक्षण विधियों को लागू किया। प्रदूषित पानी को साफ करने व उसका फिर उपयोग करने के लिए फैक्टि्रयों में संयंत्र लगाए।
सोशल मीडिया और ब्रांडिंग: युवा अपने प्रोडक्ट का सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रमोशन कर रहे हैं। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए कपड़ों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे है। उसे मानकों के साथ ही बाजार में ला रहे हैं।
महिला सशक्तीकरण : महिलाओं को रोजगार देकर महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। गारमेंट में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनको रोजगार दे रहे है। उनको घर से लाने व पहुंचाने के लिए पूर्ण सुरक्षित बसें लगाई है।
बदलाव पर नजर: देश के सूरत जैसे शहरों के गारमेंट व प्रोडक्ट पर नजर रखते हैं। इसके साथ ही विदेशों में बनने वाले फेब्रिक्स का ख्याल रखकर नई-नई डिजाइन बाजार में ला रहे हैं। हर्बल रंगों का भी उपयोग कर रहे हैं।