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राजस्थान का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ घूमने का सुनहरा मौका, रेलवे ने बढ़ाई वैली क्वीन हैरिटेज ट्रेन की तारीख, अब इस दिन तक उठाएं लुत्फ

Valley Queen Heritage Train: उत्तर पश्चिम रेलवे ने वैली क्वीन हैरिटेज ट्रेन की संचालन अवधि 30 सितंबर तक बढ़ा दी है। मारवाड़ जंक्शन से गोरम घाट तक अरावली के खूबसूरत घाटों से गुजरने वाली यह ट्रेन पर्यटन का बड़ा आकर्षण है।

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पाली

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Arvind Rao

Mar 24, 2026

Valley Queen Heritage Train

Valley Queen Heritage Train (Patrika Photo)

Valley Queen Heritage Train Operations Extended: मारवाड़ जंक्शन (पाली): राजस्थान के रेतीले धोरों और किलों की ख्याति पूरी दुनिया में है। लेकिन इसी मरुधरा के दक्षिण-पश्चिमी अंचल में अरावली की पर्वतमालाओं के बीच एक ऐसा छिपा हुआ खजाना है, जो आपको यूरोप की वादियों का अहसास कराता है।

उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) की 'वैली क्वीन हेरिटेज रेल' महज एक ट्रेन नहीं, बल्कि राजस्थान की प्राकृतिक सुंदरता और गौरवशाली इतिहास को आपस में जोड़ने वाली एक जादुई कड़ी है। मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र की प्रसिद्ध हैरिटेज रेल सेवा मारवाड़ जंक्शन-खामली घाट-मारवाड़ जंक्शन वैली क्वीन मीटर गेज रेल के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय किया है। अब यह सेवा निर्धारित अवधि से आगे भी संचालित की जाएगी।

लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र

यह रेल सेवा अरावली क्षेत्र के खूबसूरत घाट सेक्शन से होकर गुजरती है, जो यात्रियों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ऐतिहासिक रेल यात्रा का अनूठा अनुभव कराती है। पर्यटकों और रेल प्रेमियों के बीच यह ट्रेन विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

ऐसी है कोच संरचना

  • 1 एसी एक्जीक्यूटिव कोच
  • 2 कोच
  • 1 पावरकार लगाया जाएगा

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

रेलवे के इस निर्णय से क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वैली क्वीन हैरिटेज ट्रेन न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बाहरी पर्यटकों के लिए भी एक खास आकर्षण बनकर उभरी है।

विंटेज लुक और आधुनिकता का संगम

वैली क्वीन की सबसे पहली झलक ही आपको समय के पीछे ले जाती है। हालांकि, यह आधुनिक तकनीक और डीजल इंजन पर आधारित है, लेकिन इसे 150 साल पुराने भाप इंजन का लुक दिया गया है।

ट्रेन के डिब्बों पर उकेरे गए राजस्थानी कला, हाथी और घोड़ों के चित्र इसे 'शाही सवारी' का अहसास कराते हैं। इस सफर का सबसे खास हिस्सा इसका विस्टाडोम कोच है। इसकी विशाल कांच की खिड़कियां और पारदर्शी छत यात्रियों को अरावली के पैनोरमिक दृश्यों का 360-डिग्री अनुभव प्रदान करती हैं।

इंजीनियरिंग का अद्भुत करिश्मा

मारवाड़ जंक्शन से कामलीघाट के बीच का यह 47 किलोमीटर का सफर इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। यह मार्ग ब्रिटिश काल की विरासत है जो आज भी अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। इस रोमांचक यात्रा के दौरान ट्रेन 172 छोटे-बड़े पुलों से गुजरती है। 2 ऐतिहासिक सुरंगों को पार करती है, जो करीब एक सदी पुरानी हैं। जब ट्रेन इन अंधेरी सुरंगों में प्रवेश करती है, तो बच्चों से लेकर बड़ों तक का रोमांच चरम पर होता है।

गोरम घाट: राजस्थान का मिनी-कश्मीर

सफर का सबसे मनमोहक पड़ाव गोरम घाट है। मानसून के मौसम में जब अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं और चारों तरफ दूधिया झरने बहने लगते हैं, तब यह स्थान किसी 'मिनी-कश्मीर' से कम नहीं लगता। ट्रेन यहां कुछ समय के लिए रुकती है, जिससे पर्यटक नीचे उतरकर ताजी पहाड़ी हवा, फोटोग्राफी और छोटी ट्रेकिंग का आनंद ले सकें।

यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

  • संचालन दिन- मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार
  • प्रस्थान (मारवाड़)- सुबह लगभग 09:45 बजे
  • आगमन (कामलीघाट)- दोपहर लगभग 12:45 बजे
  • अनुमानित किराया- 2,000 प्रति व्यक्ति (रिफ्रेशमेंट सहित)

बुकिंग और सुझाव

इस ट्रेन में केवल 60 सीटें उपलब्ध हैं, इसलिए इसकी मांग बहुत अधिक रहती है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे IRCTC की वेबसाइट या ऐप के माध्यम से अग्रिम बुकिंग कराएं। वैसे तो सर्दियों का मौसम सुखद होता है, लेकिन यदि आप प्रकृति के रौद्र और सुंदर रूप (झरनों) को देखना चाहते हैं, तो अगस्त और सितंबर का समय सबसे उपयुक्त है। रेगिस्तान के बीच हरियाली और इतिहास का यह अनूठा सफर हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।