
मां और बेटा। फोटो- पत्रिका
पाली। मां का प्यार और त्याग किसी भी शब्दों में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। एक मां अपने बच्चे की खुशी और जीवन के लिए हर कठिनाई सह लेती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण पाली जिले के धनला गांव में देखने को मिला, जहां एक मां ने अपने बेटे को नई जिंदगी देने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। वहीं बेटे ने भी मां के इस त्याग को जीवनभर याद रखते हुए अपना कारोबार छोड़ गांव में रहकर उनकी सेवा करने का फैसला किया।
धनला के पानी की टंकी मोहल्ला निवासी 76 वर्षीय छगनीदेवी पत्नी दीपाराम सीरवी ने अपने बेटे 52 वर्षीय भंवरलाल उर्फ भीमा सीरवी को किडनी देकर उसकी जान बचाई। भंवरलाल ने वर्ष 1988 में कक्षा 9 तक पढ़ाई करने के बाद पूना जाकर व्यवसाय शुरू किया था। वर्ष 1996 में शादी के बाद उनका पूरा परिवार पूना में रहने लगा, जबकि उनके माता-पिता गांव में खेती-बाड़ी का काम संभालते रहे।
वर्ष 2011 में भंवरलाल की तबीयत अचानक खराब रहने लगी। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। करीब एक साल तक डायलिसिस कराने के बाद चिकित्सकों ने किडनी प्रत्यारोपण की सलाह दी। इसके बाद परिजन उन्हें अहमदाबाद लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने परिवार के लोगों से किडनी दान करने की बात कही। उस समय मां छगनीदेवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बेटे को एक किडनी देने का फैसला कर लिया।
वर्ष 2012 में सफल ऑपरेशन के बाद भंवरलाल को नई जिंदगी मिली। इसके बाद उन्होंने पूना में अपना जमाया हुआ व्यवसाय छोड़ दिया और गांव लौट आए। गांव में उन्होंने छोटी दुकान शुरू की और खेती-बाड़ी का काम संभाल लिया। दो वर्ष पहले उनके पिता का निधन हो गया। तब से भंवरलाल परिवार सहित अपनी मां के साथ रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। भंवरलाल का कहना है कि उनकी मां उनके लिए भगवान से भी बढ़कर हैं। मां की वजह से ही उन्हें दूसरा जीवन मिला है। उनका कहना है कि सौ जन्म लेने के बाद भी वह मां का ऋण कभी नहीं चुका सकते हैं।
Updated on:
10 May 2026 03:24 pm
Published on:
10 May 2026 03:03 pm
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