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Organ Donation: जाते-जाते तीन लोगों को नई जिंदगी दे गया ओमप्रकाश, किडनी दिल्ली, लिवर जयपुर में हुआ ट्रांसप्लांट

Organ Donation: जयपुर के 44 वर्षीय ओमप्रकाश सड़क हादसे में जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन उनके अंगदान ने तीन जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी दे दी। एसएमएस अस्पताल में सफल कैडेवर ऑर्गन डोनेशन के तहत दोनों किडनी दिल्ली भेजी गईं, जबकि लिवर का जयपुर में प्रत्यारोपण किया गया।

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जयपुर

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Kamal Mishra

May 08, 2026

Organ Donation Jaipur

अंगदान का प्रमाणपत्र प्राप्त करते ओमप्राकाश के परिजन (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजधानी के वाटिका निवासी 44 वर्षीय ओमप्रकाश भले ही सड़क हादसे के बाद जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन उनका अंतिम फैसला तीन जरूरतमंद मरीजों के लिए नई जिंदगी की सौगात बन गया। एसएमएस अस्पताल में हुए सफल कैडेवर ऑर्गन डोनेशन के जरिए उनके अंगों ने तीन परिवारों के जीवन में उम्मीद और खुशियां लौटा दीं। इस मानवीय पहल की अब हर ओर सराहना हो रही है।

जानकारी के अनुसार 3 मई को ओमप्रकाश एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। हादसे के बाद उन्हें तुरंत जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनका उपचार कर रही थी। कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और गुरुवार रात चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

गहरे दुख में परिवार का बड़ा निर्णय

इसके बाद अस्पताल की ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर टीम ने परिजनों से अंगदान को लेकर बातचीत की। कठिन परिस्थितियों और गहरे दुख के बीच परिवार ने बड़ा निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दे दी। परिजनों के इस फैसले ने तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने का रास्ता खोल दिया।

ग्रीन कॉरिडोर से दिल्ली गई किडनी

शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक एसएमएस अस्पताल में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। ऑर्गन ट्रांसप्लांट के नोडल प्रभारी डॉ. मुकेश भास्कर ने बताया कि ओमप्रकाश की दोनों किडनी दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) अस्पताल भेजी गईं। इसके लिए जयपुर में विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि अंग कम समय में सुरक्षित तरीके से दिल्ली पहुंचाए जा सकें।

SMS अस्पताल में हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

वहीं ओमप्रकाश का लिवर एसएमएस अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। डॉक्टरों के अनुसार समय पर मिले अंगदान से मरीज को नया जीवन मिल सका।

इन लोगों की रही अहम भूमिक

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी, जॉइंट डायरेक्टर डॉ. चित्रा सिंह, डॉ. मुकेश भास्कर और एनेस्थीसिया विभाग की आचार्य डॉ. प्रियंका समेत कई विशेषज्ञों की अहम भूमिका रही।

मानवता की मिशाल

ओमप्रकाश अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका अंगदान मानवता की ऐसी मिसाल बन गया है, जिसने यह साबित कर दिया कि किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा दान कोई नहीं होता।