
रायपुर मारवाड़ . सेंदड़ा के पास रामगढ़ मार्ग पर मंगलवार शाम को उस समय ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया जब रेलवे ब्रिज निर्माण को लेकर निर्माण कम्पनी ने रास्ता बंद कर दिया। रास्ता बंद कर देने से भडक़े ग्रामीणों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब दो घंटे के प्रदर्शन के बाद निर्माण कम्पनी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। उन्होंने बंद रास्ते को दुबारा खोला तब जाकर ग्रामीण शांत हुए। ग्रामीणों ने दुबारा रास्ता बंद करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
दरअसल, दिल्ली-अहमदाबाद रेलवे मार्ग पर इन दिनों अतिरिक्त रेलवे लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। येे कार्य एक निर्माण कम्पनी द्वारा किया जा रहा है। शाम को इस कम्पनी ने ब्रिज निर्माण के लिए नींव खोदने का कार्य शुरू किया। कम्पनी ने सेंदड़ा के रामगढ मार्ग पर पुराने पुलिए के पास आम रास्ते को बंद कर आधुनिक मशीन के जरिए नींव खोदनी शुरू कर दी। आम रास्ता बंद कर देने से करीब आठ गांवों का आवागमन अवरूद्ध हो गया। वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। इसकी जानकारी मिलते ही रामगढ सहित आधा दर्जन गांवों के लोग वहां एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य बंद कर रास्ता खोलने की मांग को लेकर हंगामा कर दिया। ग्रामीणों ने खुदाई कार्य बंद करवा दिया। हंगामे की सूचना पर निर्माण कम्पनी के प्रतिनिधि वहां पहुंचे। काफी समझाइश के बाद भी जब ग्रामीण नहीं माने तो कम्पनी ने मिट्टी डलवा गड्ढे को दुबारा बंद कर रास्ता खोल दिया। इस दौरान सेंदड़ा के पूर्व सरपंच पांचूसिंह चौहान, बलवीरसिंह भाटी, सुखदेव जांगिड़, प्रतापसिंह, नारायणसिंह, मलाराम, चिमनसिंह, रामसिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
ये गांव हो गए प्रभावित
सेंदड़ा से जस्साखेड़ा जाने वाले मार्ग पर रामगढ से पहले पुराना रेलवे पुलिया है। ये आम रास्ते पर है। इस पुलिए के नीचे होकर ग्रामीण आवाजाही करते हैं। इस आम रास्ते को बंद कर देने से रामगढ, कुरातिया, मानपुरा, झाड़ली, कोटड़ा, काबरा सहित करीब आठ गांवों में जाने का रास्ता अवरुद्ध हो गया था।
कैसे जाते स्कूली बच्चे
पुराना पुलिया छोटा होने से बड़े वाहनों की आवााजाही नहीं हो पाती है। इस मार्ग पर दुपहिया वाहन व चार पहिया वाहन ही गुजरते हैं। इन आठ गांवों के करीब 400 विद्यार्थी सेंदड़ा के सरकारी व निजी स्कूलों में पढने जाते हैं। रास्ता बंद करने से विद्यार्थियों के स्कूल आना जाना बंद हो जाता है। ये रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डाल पैदल रेलवे लाइन पार करनी पड़ती।