
पाली। प्रदेशभर में चुनावी रंगत जोरों पर है। लोकतंत्र का उत्सव मनाने की पुरजोर तैयारियां चल रही है। बाहरी अंचलों में भी खासा उत्साह है। अन्य प्रदेशों में व्यवसाय कर रहे प्रवासी राजस्थानी मतदान में हिस्सा लेने के लिए लौटने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय प्रत्याशियों ने न्यौता भी भिजवा दिया है। प्रदेश में अगले माह 7 दिसम्बर को होने वाले मतदान में शिरकत करने के लिए उनमें गजब का उत्साह है। कई प्रत्याशी टिकट मिलने से पहले विभिन्न राज्यों में का दौरा कर चुके हैं तो कई सोशल मीडिया और मोबाइल संदेश से प्रवासियों को निमंत्रण भिजवा रहे हैं।
ट्रेनों-बसों से आएंगे प्रवासी
प्रवासी राजस्थानी चुनाव को किसी शादी-समारोह से कम नहीं मानते। इसलिए वे परिवार सहित हर चुनाव में हिस्सा लेने यहां पहुंचते हैं। चुनावों में उनका हरसंभव सहयोग मिलता है। प्रत्याशियों को भी प्रवासी राजस्थानियों के आगमन का बेसब्री से इंतजार रहता है। ट्रेन, बस और हवाई जहाज समेत विभिन्न साधनों से प्रवासियों का आगमन इसी सप्ताह शुरू हो जाएगा। कई प्रवासी चुनाव प्रचार में भी शामिल हुए हैं। टे्रनों और बसों में टिकट बुक करा दिए गए हैं। कई प्रवासी हवाई सफर से पहुंचेंगे।
सक्रिय व्यापारियों को जिम्मा
व्यापार के साथ सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने वाले प्रवासी राजस्थानियों को जिम्मा दिया गया है कि वे सभी को मतदान कराने अवश्य लाएं। इसके लिए पिछले कई दिनों से बैंगलूरु, सूरत, मु बई, अहमबाद, चैन्नई समेत कई शहरों में भी प्रत्याशियों का प्रचार किया जा रहा है।
7 दिसम्बर को होने वाले मतदान में बड़ी तादाद में प्रवासी राजस्थानी शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। मतदान में हिस्सा लेकर लोकतंत्र को मजबूत करेंगे। -ओमसिंह राजपुरोहित, भोपालसिंह राजपूत, केवलराम पटेल, व्यवसायी, बैंगलूरु
सियासत में दिलचस्पी
प्रदेश की सियासत में प्रवासी राजस्थानियों की पूरी दिलचस्पी रहती हैं। अब तक कई प्रवासी देश-प्रदेश की पंचायत का सफर तय कर चुके हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में राजस्थानी बड़ी तादाद में रहते हैं। मारवाड़ी नाम से पहचान रखने वाले प्रवासी राजस्थानी ज्यादातर पाली, जालोर व सिरोही जिलों के रहने वाले हैं। बरसों पहले व्यापार के लिए विभिन्न राज्यों का रुख करने वाले मारवाडिय़ों ने व्यापार में ऊंचाइयां तय करने के बाद भी अपने घर से दूरियां नहीं रखी। सियासत हो या त्योहार हर अवसर पर उनका आना-जाना रहता है।