
पाली। विधानसभा चुनाव में इस बार नोटा का बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या सैकड़ों नहीं हजारों में रही। जिले की छह विधानसभाओं में इस बार 86 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन 12 हजार 888 मतदाताओं को एक भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया। हालांकि गत विधासभा चुनाव (2013) के नोटा दबाने वाले18 हजार 753 मतदाताओं की अपेक्षा इस बार नोटा का उपयोग करने वाले मतदाताओं की संख्या अधिक रही।
वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत में होने वाले चुनावों में बदलाव आया। बैलेट पेपर व इवीएम में बदलाव लाते हुए नोटा का विकल्प शामिल किया गया। इससे उन लोगों को सुविधा हुई जो अपने मताधिकार का उपयोग तो करना चाहते हैं, लेकिन किसी पार्टी या प्रत्याशी विशेष को वोट नहीं देना चाहते। नोटा बटन का प्रावधान पहली बार राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम, दिल्ली और मध्यप्रदेश राज्यों में हुए चुनावों में किया गया था। जिले की छह विधानसभाओं से इस बार नोटा का बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या 12 हजार 888 रही। जो पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे (7885), इंदू चौधरी (5414), राजूगिरी (5616) सहित 50 से अधिक निर्दलीयों को मिले मतों से ज्यादा है।
हॉट सीट मारवाड़ पर भी नोटा का असर
मारवाड़ जंक्शन विधानसभा से इस बार पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे व कांग्रेस से बागी होकर खुशवीरसिंह निर्दलीय मैदान में उतरे। जबकि भाजपा से केसाराम चौधरी व कांग्रेस से जसाराम राठौड़ मैदान में थे। ऐसे में चुनाव परिणाम के लिहाज से यह सीट हॉट सीट बनी हुई थी। 11 दिसम्बर को आए परिणाम भी कुछ ऐसे ही रहे। टक्कर निर्दलीय खुशवीरसिंह व भाजपा केसाराम चौधरी के बीच हुई। आखिरकार निर्दलीय खुशवीरसिंह 251 मतों से विजय घोषित किए गए। इस सीट पर नोटा का बटन दबाने वालों की सं या 2719 रही जो केसाराम चौधरी के हार के अंतर 251 से कई अधिक है।
सबसे ज्यादा बाली में हुआ नोटा का उपयोग
विधानसभा चुनाव 2018 में जिले की बाली विधानसभा से 5334 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया जो सबसे अधिक है। वहीं जैतारण विधानसभा से 809 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया जो सबसे कम है।
गत चुनाव से कम हुआ इस बार नोटा का उपयोग
विधानसभा : 2013 व 2018
पाली - 1925 व 2026
जैतारण - 2038 व 809
बाली - 3623 व 5334
सोजत - 3485 व 1387
सुमेरपुर - 3186 व 613
मारवाड़ - 4496 व 2719