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Pali: खांसी-निमोनिया की जांच कराने पहुंचे थे भाई-बहन, रिपोर्ट देख उड़े डॉक्टरों के होश; शरीर में दिल और लिवर मिले उलटी तरफ

Pali Rare Medical Case: राजस्थान के पाली में दो भाई-बहनों के शरीर में दिल और लिवर की जगह सामान्य से उलटी मिली। जांच के दौरान दुर्लभ बीमारी की आशंका सामने आई, जिसके बाद दोनों को जेनेटिक काउंसलिंग के लिए एम्स जोधपुर भेजा गया।
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Updated: 3 Nov 2026, 11:46 AM IST
Pali Rare Medical Case
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पाली. शरीर की बनावट सामान्य, लेकिन भीतर से बिल्कुल अलग… सीने में दिल अपनी तय जगह यानी बाई ओर नहीं, बल्कि दाई तरफ धड़क रहा है। लिवर भी दाई के बजाय बाई तरफ मौजूद है। हैरानी की बात यह है कि शरीर के भीतर अंगों की यह उलटी व्यवस्था सिर्फ एक बच्ची में नहीं, बल्कि उसके छोटे भाई में है। इसका राज भाई को बचपन से चली आ रही खांसी, सांस लेने में परेशानी और बार-बार होने वाले निमोनिया की जांच करने पर खुला। बांगड़ चिकित्सालय में 25 अक्टूबर को 13 साल की बालिका और उसके 10 साल के भाई को परिजन जांच के लिए पहुंचे थे। दोनों बच्चों की पुरानी श्वसन संबंधी परेशानियों और अंगों की असामान्य स्थिति ने चिकित्सकों का ध्यान एक दुर्लभ बीमारी की संभावना की ओर खींचा।

क्या है कार्टाजेनर सिंड्रोम ?

प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया एक दुर्लभ, प्रायः आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की कोशिकाओं पर मौजूद सूक्ष्म बाल जैसी संरचनाएं, जिन्हें सिलिया कहा जाता है। वे ठीक से काम नहीं करतीं। ये संरचनाएं श्वसन मार्ग से बलगम और धूल कणों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब सिलिया की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, तो रोगी को बचपन से लगातार खांसी, बार-बार श्वसन संक्रमण, नाक बहना और साइनस की समस्या हो सकती है। समय पर पहचान और उपचार नहीं होने पर कुछ मरीजों में फेफड़ों की नलियों का स्थायी फैलाव यानी ब्रोंकिएक्टेसिस भी विकसित हो सकता है।

विपरित दिशा में कई अंग

दोनों की सीटी स्केन, पेट की सोनोग्राफी सहित सारी जांचें करवाई, जिसमें सामने आया कि दोनों के हार्ट दाईं और लिवर बाईं ओर स्थित है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में साइटस इनवर्सस कहा जाता है। इसके अलावा अन्य अंग भी वितरित दिशा में है। ऐसे मामलों में कार्टाजेनर सिंड्रोम और प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया की संभावना के चलते जेनेटिक काउंसिलिंग के लिए दोनों को जोधपुर एम्स भेजा गया।

इनका कहना है…

बचपन से लगातार खांसी, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण और साइटस इनवर्सस का संयोजन मिलने पर प्राइमरी सिलियरी डिस्काइनेशिया की जांच पर विचार किया। बालिका में अंतिम निदान के लिए आवश्यक जांच और विशेषज्ञ मूल्यांकन जरूरी है।
-डॉ. लक्ष्मण सोनी, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी विभाग, मेडिकल कॉलेज, पाली

Updated on:
3 Nov 2026, 11:46 AM IST
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