
सादड़ी (पाली)। अरावली की वादियों में स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के मुक्ताकाशी रंगमंच पर जब लोक कलाकारों ने लोक संस्कृति के रंग बिखेरे तो देसी-विदेशी सैलानी राजस्थानी संस्कृति के कायल हो उठे। मौका था पाली जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग तथा नगर पालिका मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को रणकपुर-जवाईबांध महोत्सव के रंगारंग आगाज का। यहां रंगारंग सांस्कृतिक शाम का सैलानियों ने जमकर लुत्फ उठाया।
इससे पहले शुक्रवार सुबह दो दिवसीय रणकपुर महोत्सव के तहत म्यूजिकल योगा में गजेंद्र कुमार बगड़ी नगर ने विभिन्न आसन के साथ ही प्राणायाम का योगाभ्यास कराया। वहीं देसी-विदेशी सैलानियों को अरावली के सौन्दर्य से रूबरू कराने के लिए जंगल सफारी के साथ ही नेचर वॉक भ्रमण कराया गया। यहां कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य सादड़ी एसीएफ कार्यालय की ओर से एसीएफ याघवेंद्रसिंह चुंडावत, अन्तर कंवर, ईश्वरसिंह, विरमदेवसिंह सोनीगरा के निर्देशन में सैलानियों को ये यात्रा कराई गई। यहां देसूरी उपखण्ड अधिकारी हसमुख कुमार, तहसीलदार ईश्वरलाल खटीक, एएसआइ रणजीतसिंह सहित काफी संख्या में लोग व स्कूली बच्चों ने भाग लिया।
दीपदान से चहक उठा रणकपुर मंदिर
शाम को रणकपुर मन्दिर पर मन्दिर पेढ़ी जसराज गहलोत, पर्यटन गाइड हसमुख शर्मा की ओर से जिला कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा व पर्यटन उपनिदेशक अजय शर्मा के सान्निध्य में दीपोत्सव के तहत तीन हजार दीपक से मन्दिर को सजाया तो मंदिर भी खिल उठा। इसके बाद देर शाम मघाई नदी मुहाने सूर्य मन्दिर के मुक्ताकाशी रंगमंच पर चतुर्दशी की धवल चांदनी में लोकगीतों का रंगारंग कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें राजस्थान प्रदेश के विभिन्न अंचल से आए राजस्थानी लोक कलाकारों ने एक से बढकऱ एक उम्दा प्रस्तुति देकर अपने हुनर का लोहा मनवाया। इस दौरान भगवान सूर्यनारायण मंदिर में पुजारी महेश शर्मा ने भगवान का आंगी से शृंगार किया। यहां अंग्रराज जूलिया ने मशकवादन पेश किया तो लाल आंगी गेर कलाकारों तथा सुसज्जित अश्व पर सवारों ने मेहमानों का स्वागत किया।
हॉट बैलून व रॉक क्लाम्बिंग का आकर्षण
कार्यक्रम में एडवेंचर एक्टीविटी के तहत हेलीपेड ग्राउंड में हॉट बैलून, पैरासिलिंग व रॉक क्लाइम्बिंग गतिविधियां करवाई गई, जिसका सैलानियों ने जमकर लुत्फ उठाया। कार्यक्रम में सहायक वन संरक्षक डॉ. राजेन्द्र पुनमिया, सुरेशपुरी गोस्वामी, राजस्व निरीक्षक इरफान बेग, गोविंदसिंह चम्पावत, लिखमाराम, प्रदीपसिंह, महिपालसिंह सोलंकी, नरपतसिंह चांदराई, सुरेंद्रसिंह आदि ने सहयोग किया।