पाली

अब रणकपुर-कुम्भलगढ़ की घट जाएगी दूरी, सैलानी प्रकृति, पर्यावरण व वन्यजीवों का उठा सकेंगे लुत्फ

महज 20 किलोमीटर के सफर में देख सकेंगे रणकपुर व कुम्भलगढ़़ दुर्ग

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May 25, 2022
रणकपुर मंदिर व कुम्भलगढ़ दुर्ग

Ranakpur-Kumbhalgarh : पाली/सादडी। कुम्भलगढ़ अभयारण्य की सादडी रेंज में माण्डीगढ़ से महूडीखेत वाया बेडाथाक वनपथ निर्माण के दूसरे चरण की जल्द स्वीकृतियां मिले तो सैलानी महज 20 किलोमीटर वनपथ भ्रमण ककेदौरान विश्व विख्यात रणकपुर मन्दिर व ऐतिहासिक कुम्भलगढ़ दुर्ग को एक ही दिन में देख सकेंगे। इस वनपथ निर्माण से गश्त सहित अवैधानिक गतिविधियों पर अंकुश लग पाएगा। वनपथ सफारी से राजस्व भी प्राप्त होगा। सैलानी वनपथ सफारी में वन्यजीव अठखेलियों को निकटता से निहारने के साथ प्रकृति का भी लुत्फ उठा पाएगा।

कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादडी रेंज अधिनस्थ माण्डीगढ़ वनखण्ड में पिछले वर्ष वन विभाग मनरेगा तहत माण्डीगढ़ से महूडी खेत वाया बेडाथाक तक करीब 7 किलोमीटर वनपथ निर्माण का दो चरण में प्रस्ताव बनाकर भेजा। जिसमें माण्डीगढ़ से भाखरमाताजी मन्दिर तक 2.5 किलोमीटर निर्माण की स्वीकृति मिली है। इस पर निर्माण करवाया गया। विभाग ने हाल में दूसरे चरण में देवनारायण मन्दिर से महूडीखेत वाया बेडाथाक तक मनरेगा के तहत वनपथ निर्माण के प्रस्ताव बनाकर भेज दिए। जिनकी प्रशासनिक व वित्तिय स्वीकृतियां जल्द मिले तो बेडाथाक तक 7 किमी एक नया वनपथ तैयार हो जाएगा। जिससे ऐतिहासिक कुम्भलगढ़ दुर्ग की दूरी कम होने के साथ ही महज 20 किमी वनपथ सफारी में देशी विदेशी सैलानी रणकपुर मंदिर, कुम्भलगढ़ दुर्ग तक पहुंच सकेंगे। वनपथ सफारी सुचारू होने से वनकार्मिकों की गश्त शुरू होगी। इस वनक्षेत्र की अवैधानिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लग जाएगा।

रणकपुर-कुम्भलगढ़ की यूं घट जाएगी दूरी
सैलानी को ऐतिहासिक कुम्भलगढ़ दुर्ग पहुंचने के लिए वर्तमान में रणकपुर, सायरा व चारभुजा केलवाड़ा रूट से जाना पड़ता है। इन दोनों रुट से 55 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में सैलानी रणकपुर या कुम्भलगढ़़ एक ही स्थल का अवलोकन कर पाते हैं। इससे रणकपुर से सैलानियों के मोह कम होने लगा है। इससे पर्यटन पर भी आने वाले दिनों में बुरा प्रभाव पड़ेगा।

यह वनपथ पूर्ण होता है तो रणकपुर से माण्डीगढ़ की दूरी 13 से 14 किलोमीटर एवं आगे वनपथ की दूरी 7 से 8 किलोमीटर ही होगी। करीब 20 किलोमीटर के सफर में सैलानी प्रकृति पर्यावरण व वन्यजीवों का लुत्फ उठाते हुए दो स्थल एक साथ देख पाएगा। इससे पर्यटन बढ़ेगा व राजस्व आय भी मिलेगी।

दूसरे चरण का काम बाकी
माण्डीगढ़ से भाखर माताजी तक मनरेगा के तहत वनपथ निर्माण हो गया है। दूसरे चरण में देवनारायण मन्दिर से बेडाथाक महूडीखेत तक वनपथ निर्माण का प्रस्ताव बना कर भेज दिया है। स्वीकृतियां मिलती ही निर्माण शुरू करवाकर वनपथ पूर्ण होते ही सफारी सेवा शुरू की जाएगी। विभाग की गश्त भी सुद़ढ होगी व आय भी बढ़ेगी। -किशनसिंह राणावत, क्षेत्रीय वन अधिकारी, कुम्भलगढ़ अभयारण्य रेंज सादडी

Published on:
25 May 2022 04:49 pm
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