Sardarsamand Dam: पिछली बार बांध भरने पर भी बागड़िया गांव की करीब 500 बीघा, अरटिया गांव की 1500 बीघा, निम्बली गांव की 1400 बीघा से अधिक सहित बांडाई गांव की भूमि प्यासी रह गई थी।
Sardarsamand Dam: पाली जिले का दूसरा सबसे बड़ा बांध सरदारसमंद तीस साल बाद छलका है। बांध कमाण्ड क्षेत्र के 20 गांवों के किसानों में खुशी छाई है, लेकिन टेल के किसानों में हर्ष नहीं है। वे असमंजस में है कि पानी उनके खेतों तक पहुंचेगा या नहीं। यदि नहीं पहुंचता तो हमेशा की तरह वे परम्परागत रूप से होने वाली फसल ही ले सकेंगे।
अमृत का सागर भरने का कोई लाभ नहीं होगा। टेल तक पानी नहीं पहुंचने का बड़ा कारण है बांध कि 77 किलोमीटर की नहरों का क्षतिग्रस्त व कच्चा होना है। इसी कारण पिछली बार बांध भरने पर भी पाली के बागड़िया गांव की करीब 500 बीघा, अरटिया गांव की 1500 बीघा, निम्बली गांव की 1400 बीघा से अधिक सहित बांडाई गांव की भूमि प्यासी रह गई थी।
सरदारसमंद बांध की नहरें व वितरिकाएं 77 किमी से अधिक क्षेत्र में फैली है। इनमें बांडाई गांव करीब 35 किमी की दूरी पर है। वहीं अरटिया 30 किमी, बागड़िया 25 किमी, निम्बली उड़ा 25 किलोमीटर की दूरी है। वहां तक कच्ची नहरों में उगी झाड़ियों व पक्की के क्षतिग्रस्त होने से पानी नहीं पहुंचता है।
किसान गजेन्द्रसिंह बांडाई, मांगीलाल पटेल अरटिया, नारायणलाल बागोरा भाट बागड़िया व घीसूलाल पालीवाल निम्बली उड़ा का कहना है कि नहरों के क्षतिग्रस्त होने व कच्चा होने से उनकी क्षमता नहीं है कि वे टेल तक पानी पहुंचा सके। इस कारण टेल के किसान बांध भरने पर भी सिंचाई नहीं कर पाते है। हमारे खेत भी टेल में है। सिंचाई अभाव में नुकसान भी होता है।