पाली

विद्यालयों ने ‘हमाल’ बना दिया हमारे बच्चों को

-सरकारी और निजी सभी स्कूलों में बस्तों का बोझ बहुत ज्यादा-चिकित्सकों के अनुसार हड्डियों पर पड़ता है बुरा प्रभाव
2 min read
Dec 02, 2018
School students' health
विद्यालयों ने ‘हमाल’ बना दिया हमारे बच्चों को

पाली। अन्तरराष्ट्रीय नियम के अनुसार बच्चों के कंधों पर उनके कुल वजन से 10 फीसदी ज्यादा वजन नहीं होना चाहिए। जबकि हमारे यहां यह नियम ताक पर रखा हुआ है। राजस्थान पत्रिका टीम ने शनिवार को बस्तों के वजन की पड़ताल की। इस पर पता लगा कि पहली कक्षा में पढऩे वाले सरकारी स्कूल के बच्चे का वजन ही 3.15 किलो है। जबकि निजी स्कूल की कक्षा दसवीं में पढऩे वाले बच्चे के स्कूल बैग का वजन 12.600 किलोग्राम था।

ऐसी ही स्थिति अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थियों के बस्तों की थी। जिनको वे रोजाना पीठ पर लादकर स्कूल जाते हैं। इसमें भी बड़ी बात यह है कि निजी स्कूल खुद को बेहतर बताने और ज्यादा सिखाने के नाम पर बस्ते का बोझ लगातार बढ़ा रहे है। उनको नियमों की भी परवाह नहीं है। हालांकि, हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बस्तों का वजन तय किया है। अब स्कूलों को उसके अनुसार तय करना होगा कि जिन पुस्तकों की जरूरत नहीं है। वे पुस्तकें बच्चे स्कूल नहीं लाए।

सरकारी स्कूल के बस्तों का वजन
कक्षा प्रथम 3.15 किलो
कक्षा तृतीय 4.75 किलो
कक्षा आठ 8 किलो
निजी स्कूल के बस्तों का वजन
कक्षा दूसरी 4.50 किलो
कक्षा तीसरी 5 किलो
कक्षा नवमीं 6.50 किलो
कक्षा दसवीं 12.600 किलो
नए मानकों के अनुसार तय वजन
कक्षा पहली व दूसरी 1.5 किलो
कक्षा तीसरी से पांचवी 2-3 किलो
कक्षा छठी से सातवीं 4 किलो
कक्षा आठवीं व नवमीं 4.5 किलो
कक्षा दसवीं 5 किलो

यह कहते है एक्सपर्ट : डॉ. विक्रम ओझा, ऑर्थोपेडिक
-बच्चों की हड्डियां सॉफ्ट होती है। बस्ते का बोझ अधिक होने पर जिस तरफ प्रेशर अधिक रहेगा। हड्डियां उसी तरफ अधिक बढ़ेगी और उनकी सामान्य की जगह अव्यवस्थित बढ़ोतरी होने से शरीर भी उसी के अनुसार हो सकता है।
-कंधे पर अधिक वजन होने पर बच्चा सेंटर ऑफ ग्रेविटी के लिए आगे की तरफ झुकेगा। इससे कुबड़ निकलने की समस्या हो सकती है।
-बच्चे को कंधों में दर्द रहता है।
-कंधों पर वजन होने के कारण गर्दन की नशों में खिंचाव आता है। इससे उसके हाथों में दर्द रह सकता है।

मानक तो पहले ही तय
स्कूलों में पुस्तकें व वर्क बुक लाने के मानक तय है। कार्य पुस्तिकाएं दी गई है। उस हिसाब से बस्ते का वजन अधिक नहीं होता है। कई बार बच्चे कॉपियां, कलर व अन्य वस्तुएं भी बस्ते में लाते है। इससे वजन बढ़ जाता है। -श्यामसुंदर सोलंकी, उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, पाली

Published on:
02 Dec 2018 10:59 am