
पाली।Prime Minister Narendra Modi सरकार के पिछले कार्यकाल की स्मार्ट सिटी योजना खासी सुखिर्यों में रही थी। उसी तर्ज पर तत्कालीन प्रदेश की वसुंधरा सरकार ने भी स्मार्ट विलेज योजना के नाम पर वाब दिखाए। दोनों ही सरकारों की योजनाओं का हश्र एक जैसा ही हुआ। न शहर स्मार्ट बने और न ही गांव स्मार्ट बन पाए। सरकार बदलने के बाद स्मार्ट विलेज योजना कागजों में ही अटकी हुई पड़ी है।
Smart village Scheme के तहत धरातल पर ज्यादातर काम ही नहीं हुआ। जहां शुरू हुआ वहां गति बेहद धीमी। नतीजा, प्रदेश के 33 जिलों में स्मार्ट विलेज की अवधारणा को पूरा करने की दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। वर्ष 2017-2018 के बजट भाषण में स्मार्ट विलेज की घोषणा हुई थी। जिला परिषदों में इन योजनाओं को लेकर फाइलें व कागज चलाए और बैठकें की, लेकिन योजना पर कोई खाका तैयार नहीं हुआ। यह योजना स्वतंत्र बजट के अभाव में अन्य मदों पर निर्भर रही। बाद में सत्ता परिवर्तन हो गया और योजना कागजों में ही सिमटी रह गई। प्रदेश के 33 जिलों में स्मार्ट विलेज के करीब 2.14 लाख कार्य प्रस्तावित किए गए थे। जिनमें से महज 1713 कार्य ही पूर्ण हुए।
योजना के तहत यह होने थे काम
सौर ऊर्जा से स्ट्रीट लाइट, इ- पुस्तकालय, नॉलेज सेंटर, कचरा प्रबंधन, वाई-फाई, नेटवर्क पार्क व खेल मैदान, चारागाह विकास, सामुदायिक शौचालय, सीनियर सैकण्डरी स्कूल, प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र, पशु चिकित्सा केन्द्र, दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन, अन्न भंडार गृह, आदर्श तालाब व नदी किनारे पर स्नान घर सहित करीब 18 काम होने थे।
जिले में 119 गांव चयनित
जिले के 119 गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने थे। स्मार्ट विलेज को लेकर योजना लागू होने के दौरान खूब कवायद की गई थी। ग्रामीणों को खूब सपने दिखाए गए। लेकिन 119 गांव में से एक गांव में भी काम पूरा नहीं हो सका। कई गांवों को को जिला परिषद ने मॉडल गांव भी घोषित किया गया था।
इतने होने थे पूरे प्रदेश में काम
-3240 पूरे प्रदेश में स्मार्ट विलेज
-214492 प्रदेश में प्रस्तावित कार्य
-76603 स्वीकृत हुए कार्य
-3508 कार्य जारी
-1713 कार्य हुए पूर्ण
योजना पर काम हो रहा है
जिले में 119 गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की योजना बनी थी। इस योजना पर काम चल रहा है। इसमें 18 काम होने थे। उनमें से कई काम हुए है। जो अधूरे काम है। उन पर काम चल रहा हैं। -हरिराम मीणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद पाली।