
धर्म के प्रति अटूट आस्था का उदाहरण है 90 बसंत देख चुके पाली निवासी सोहनराज चौपड़ा, जिन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ संत सुमति कुमार, मुनि दवार्य व मुनि आगम की निश्रा में 4 जनवरी को जीवन के 90 वर्ष पूर्ण होते ही संथारा ले लिया। वे अभी पानी का सेवन कर रहे है।
उनकी भावना है कि 22 जनवरी के बाद वे पानी का भी त्याग कर देंगे। संथारा का ये निर्णय कर उन्होंने अपने संकल्प को पूरा किया है। चौपड़ा के परिवार में पुत्र पूनमचंद, महावीर चौपड़ा के साथ छह पुत्रियां, पौत्र, पड़ पौत्र और पड़ दोहिते भी है।
28 दिसम्बर से महज दो द्रव्य
चौपड़ा के 90 वर्ष 4 जनवरी को हुए। इससे पहले ही उन्होंने 28 दिसम्बर से दो द्रव्य पानी व छाछ के ऊपर का पानी लेना शुरू कर दिया। संथारा का संतों से पच्चखाण लेने के बाद से वे सिर्फ पानी ही पी रहे है। वे कहते है मैं अस्पताल में बीमार होकर नहीं रहना चाहता। प्रभु के मार्ग पर चलना ही ध्येय है।
रोजाना करते 10 सामायिक
सोहनराज चौपड़ा के दोहिते नीलेश सालेचा ने बताया कि 22 साल पहले चौपड़ा की बुआ मुली देवी ने संथारा लिया था। उसी समय उनके मन में भी संथारा लेने का भाव जाग गया था। उनकी माता रूपी देवी का निधन होने पर उन्होंने संथारा लेने का संकल्प कर लिया। संथारा के साथ धर्म व आराधना की भावना के चलते पांच-सात पहले ही रोजाना 10 सामायिक व माह में कम से कम चार उपवास करने लगे थे। इससे उनका संकल्प अधिक दृढ हुआ। करीब एक वर्ष पहले भोजन में 11 पदार्थ का सेवन करने लगे। इसके बाद पांच द्रव्य का ही उपयोग करने लगे।