
जवाई पुनर्भरण के लिए बजट के साथ डीपीआर भी बनाई थी
पाली। जवाई बांध पुनर्भरण के मुद्दे पर हमने काफी काम किया है। प्रदेश में वसुंधरा सरकार ने जवाई पुनर्भरण के लिए बजट का प्रावधान किया था और डीपीआर भी बनाई। आगे भी यह मुद्दा हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रयास रहेगा कि जिले में कहीं भी पेयजल संकट नहीं हो। जवाई बांध का पानी हर घर को मिले और किसानों को भी पर्याप्त दिया जाए। पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए पुरजोर प्रयास करेंगे। -पी.पी. चौधरी, भाजपा, प्रत्याशी
माही का पानी जवाईबांध में लाने के लिए संसद में उठाई थी आवाज
जवाई पुनर्भरण के मुद्दे पर मैंने संसद में भी तीन बार आवाज उठाई थी। तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार से भी माही बांध का पानी जवाई तक लाने के लिए परियोजना स्वीकृत करने का आग्रह किया था। गहलोत सरकार ने मेरे अनुरोध पर सर्वे के लिए 50 लाभ रुपए का बजट भी दिया था। बाद में हमारी सरकार नहीं रही। पाली में पानी का मुद्दा अहम है। माही बांध का पानी समुद्र में व्यर्थ जा रहा है। प्रयास रहेगा कि पाली में पेयजल किल्लत की नौबत क भी नहीं आए। -बद्रीराम जाखड़, कांग्रेस प्रत्याशी
आमने-सामने
जवाई रीत रहा, जलसंकट बढऩे का अंदेशा
पाली। पेयजल संकट विकराल रूप ले रहा है। शहर में 72 घंटे के अंतराल से जलापूर्ति की जा रही है। अगले दिनों में संकट और बढ़ेगा। क्योंकि जवाई बांध में पानी की मात्रा काफी कम रही है। यह सबसे बड़ा पेयजल स्रोत है। जवाई पुनर्भरण का मुद्दा बरसों से लंबित है। जवाई के पानी पर वोटों की फसल हर चुनाव में बोई और काटी जाती है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। लोकसभा चुनावों के शोर में पानी का मुद्दा कहीं खो गया है।