पाली

कपड़ा इंडस्ट्री पर संकट विभाग का फरमान जमा कराओ 20 करोड़

- सीइटीपी को लिखा पत्र, 25 फरवरी तक जमा करानी है राशि - पर्यावरण विभाग का फरमान जमा कराओ 20 करोड़
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Feb 16, 2019
Submit Decision on Crisis Department on Textile Industry
कपड़ा इंडस्ट्री पर संकट विभाग का फरमान जमा कराओ 20 करोड़




पाली. झंझावतों से जूझ रही कपड़ा इंडस्ट्री के सामने नित नई मुकिश्लें खड़ी हो रही है। दो दिन पहले जारी हुए पर्यावरण विभाग के एक आदेश ने कपड़ा उद्यमियों की चिंताएं और बढ़ा दी है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने एजीटी के आदेशों का हवाला देते हुए सीइटीपी को 20 करोड़ रुपए शीघ्र जमा कराने का फरमान जारी किया है। इससे कपड़ा उद्यमियों की नींद उड़ गई है।
प्रदूषण की समस्या के विकराल रूप लेने के बाद से ही कपड़ा उद्योग पर संकट के बादल लगातार मंडराए हुए हैं। किसान पर्यावरण संघर्ष समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 31 जनवरी को पाली के मामले में सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश दिए। इसमें अंतरिम मुआवजे के तौर पर 21 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह जुर्माना अब कपड़ा उद्योग से वसूलने की कवायद शुरू की गई है। पर्यावरण विभाग के सचिव एसके जैन ने सीइटीपी अध्यक्ष को पत्र लिखकर 20 करोड़ रुपए 25 फरवरी तक जमा कराने को कहा है। यह पैसा प्रत्येक औद्योगिक इकाइ से पानी के उपयोग के आधार पर वसूलने की सलाह दी है। सचिव ने कोर्ट के आदेशों की पालना अनिवार्य रूप से करने की भी सलाह दी है।
राज्य सरकार ने भेजा
है पत्र
&राज्य सरकार ने 20 करोड़ रुपए वसूल करने का पत्र भेजा है। पैसा वसूल करने को लेकर फिलहाल कोई तैयारी नहीं है। आगे देखते हैं क्या होता है।
प्रवीण कोठारी,
अध्यक्ष, सीइटीपी
कपड़ा इंडस्ट्री में मची हलचल
पर्यावरण विभाग के पत्र के बाद कपड़ा इंडस्ट्री में हलचल मची हुई है। एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से पैसा वसूल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सीइटीपी के पास ऐसी कोई सूची नहीं है जिसे प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। ऐसे में असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है कि आखिर 20 करोड़ की राशि कहां से संकलित की जाएगी। एनजीटी ने 1 करोड़ रुपए अलग से भी सीइटीपी को जमा कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सीइटीपी को कुल 21 करोड़ रुपए का बंदोबश्त करना पड़ेगा।

Published on:
16 Feb 2019 11:56 am