
पाली। अरब सागर में उठा तौकते तूफान गुजरात के सौराष्ट्र सहित कई जगह पर तबाही मचाता हुआ राजस्थान तक पहुंचा तो आशंका थी कि पाली में भी तबाही मचा सकता है। गुजरात से राजस्थान पहुंचने पर इसकी ताकत और रफ्तार में ज्यादा कमी नहीं हुई थी। लेकिन राजस्थान में प्रवेश करते हुए तौकते का सामना अरावली की वादियों से हुआ। जिससे टकराते ही तौकते की ताकत पानी के रूप में तेजी से बरसना शुरू हुई और पाली पहुंचते-पहुंचते उसकी ताकत लगभग खत्म हो गई। जिले में रात करीब 1 बजे तौकते के प्रभाव से बरसात का दौर शुरू हुआ। जो प्रारम्भ में तो तेज था, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता गया। उसकी रफ्तार कम होती गई। सूर्य के बुधवार रश्मियां बिखरने तक बरसात बूंदाबांदी व उसके बाद फव्वारों में बदल गई। यह स्थिति दोपहर दो बजे बाद तक बनी रही। जिले में चार बजे बाद बादल छंटने शुरू हुए और धूप खिली।
पंखे और कूलर करने पड़े बंद
जिले में तौकते आने से पहले ही मंगलवार को पूरे दिन बादल छाए रहे। इसके बाद रात में सर्द हवा के कारण लोगों को पंखे व कूलर तक बंद करने पड़े। शहर सहित जिले में बरसात का क्रम जारी रहने के दौरान तो सर्दी के कारण कई लोगों को चद्दर या कम्बल ओढकऱ बैठना पड़ा। इधर, बिजली गुल होने के कारण लोगों को परेशानी हुई।
एक्सपर्ट का कहना, ऐसे बदला तूफान
पाली के एक्सपर्ट नीलेश पुरोहित ने बताया कि तूफान के पालनपुर के आस-पास पहुंचने तक उसके जालोर के सांचौर व पाली के रोहट से होकर गुजरने का अनुमान था, लेकिन वह आठ डिग्री पर मुड़ गया। इस पर उसके अरावली के पास होते हुए पाली जिले से गुजरने की स्थिति बनी। जब यह अरावली तक पहुंचा तो गति व ताकत थी, लेकिन पहाडिय़ों में इसने ताकत खो दी। इस कारण भारी बरसात की संभावना खत्म हो गई।
बरसात के कारण सडक़ें रही सुनसान
बरसात के कारण शहर की सडक़ों पर सन्नाटा पसरा रहा। शहर के सूरजपोल, मस्तान बाबा, गांधी मूर्ति, मंथन सिनेमा तिराहा, सुभाष सर्किल, औद्योगिक क्षेत्र में पुलिसकर्मियों को रोजाना लॉकडाउन का पालन कराने के लिए धूप में मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन बुधवार को हालात अलग रहे। सडक़ों पर इक्का-दुक्का वाहन ही चले। पुलिसकर्मी भी बरसात से बचने के लिए दुकानों की छज्जों के नीचे या घूमटी में बैठे रहे।
बाजार में धंसी मिट्टी
लॉकडाउन लगने के बाद आरयूआइडीपी की ओर से शहर के मुख्य बाजारों में सीवरेज व चौबीस घंटे पाइप लाइन डालने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए खोद गए गड्ढों की मिट्टी बरसात होने के कारण धंस गई। इस कारण इन क्षेत्रों से गुजरने वाले कई वाहन चालक गिरकर चोटिल हुए। वहीं बाजार में रहने वाले लोगों को भी गड्ढों व धंसी सडक़ों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।