
लगता है प्रदेश के सबसे ऊंचे पर्वतीय पर्यटन स्थल की सुरक्षा राम भरोसे ही है। 'पत्रिका टीमÓ ने बीती रात एक से तीन बजे तक शहर के प्रमुख चौराहों और स्थलों का जायजा लिया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि माउंट आबू सरीखे हिल स्टेशन पर नक्की झील से लेकर बस स्टैण्ड और थाने से लेकर यात्रीकर नाके तक कोई सुरक्षाकर्मी (गश्ती दल) नहीं मिला। कार से करीब दो घंटे तक शहर का चप्पा-चप्पा खंगाला लेकिन न तो हमें किसी ने टोका और न ही किसी ने रोका। बस स्टैण्ड के आसपास होटलों में कमरा किराए पर देने के लिए मनुहार करते कुछ युवकों ने हाथों से इशारा कर कार जरूर रुकवाई लेकिन जब उन्हें बताया गया कि कमरा नहीं चाहिए तो वे भी वहां से निकल लिए। इस स्याह रात में तड़के करीब तीन बजे तक जो देखा और जाना, वह हूबहू आपके सामने रख रहे हैं। पेश है पत्रिका स्टिंग की लाइव रिपोर्ट-
रात 1.05 बजे, नक्की झील क्षेत्र
पत्रिका टीम सबसे पहले नक्की झील के पास पहुंची। यहां बोटिंग के लिए जाने वाला गेट बंद नजर आया। आसपास की करीब-करीब सभी दुकानें बंद दिखीं। झील के किनारे पाल के पास कुछ पर्यटक खड़े आपस में बतियाते जरूर नजर आए। निकट ही आईसक्रीम की एक दुकान वाला सामान समेटते दिखा जब हमने उससे पूछा कि इतनी रात को यहां कोई सुरक्षाकर्मी नहीं आता तो उसका जवाब था- 'भाई साहब इन पुलिस वालों का तो भगवान ही मालिक है, रात में तो कोई दिखता ही नहीं है। पुलिस गश्त का वाहन भी कभी नजर नहीं आता। दिन में कभी-कभार आ भी जाए तो आईसक्रीम खाने आ जाते हैं। हम व्यापारी जो ठहरे, उनको पैसों का भी नहीं बोल सकते।
रात- 2.33 बजे, बाजार क्षेत्र
दिन भर गुलजार रहने वाले माउंट के बाजार क्षेत्र में रात में सन्नाटा पसरा नजर आया। यानी कोई चहल-पहल नजर नहीं आई। यहां स्थित एक मंदिर में कुछ लोग जरूर दिखे लेकिन पहरेदार कोई नजर नहीं आया। यहां बाइक पर बैठे किशोर भाई ने बताया कि माउंट में सभी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए और उनकी निरन्तर मॉनिटरिंग होनी चाहिए ताकि कोई कैमरा खराब भी हो तो उसे तुरन्त बदला जा सके। वैसे यहां कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे दिखे लेकिन आसपास के लोगों ने बताया कि ये सही हंै या खराब, इसकी मॉनिटरिंग नहीं की जाती। हां, नामी दुकान- होटल वाले इस मामले में सबसे आगे हैं। खुद के स्तर पर अधिकांश होटलों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
रात- 1.46 बजे, थाने के आसपास का क्षेत्र
थाने के बाहर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं दिखा और न ही थाने के निकट, बस स्टैण्ड या दूसरी तरफ स्थित चौराहे पर कोई नजर आया। चौराहे पर दो दुकानों में सामान समेटते दुकानदार जरूर नजर आए लेकिन पुलिसकर्मी दूर-दूर तक नहीं दिखे। जैसा कि वहां मौजूद गुजरात के पर्यटक जीवन भाई पटेल बताते हैं कि वे अक्सर गर्मियों की छुट्टियों में माउंट आते रहते हैं लेकिन ऐसा पहली बार है कि प्रमुख चौराहों तक पर रात में कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। उन्होंने पर्यटक स्थल की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि 'कोई यहां बम डाल जाए तो इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यहां रात में सुरक्षा करने वाले ही नहीं दिखते तो बदमाशों पर अंकुश कौन लगाएगा।Ó
दिन में ज्यादा फोकस...
&अपराध की रोकथाम व पर्यटकों को सुविधा देने के लिए दिन में पुलिस गश्त एवं निगरानी पर ज्यादा फोकस रहता है। वैसे रात को भी निगरानी करते हैं, लेकिन गश्ती दल हीभ्रमण पर रहता है। कुछखास जगहों पर जवान भी तैनात रहते हैं।
- विजयपाल सिंह, डीएसपी, माउंट आबू
&शहर में कुछ खास जगहों पर सीसी टीवी कैमरे लगे हुए हैं। कहीं खराब हो सकते हैं इनको जल्द ही ठीक करवाएंगे।
-सुरेशकुमार ओला, एसडीएम, माउंट आबू