
रायपुर मारवाड़. दूर दराज के गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने वाली बीस छात्राओं को पड़ोसी तहसील के हॉस्टलों में आसरा मिल गया है। इससे उनके सपनों को मानो पंख लग गए हैं। यह जैतारण एसडीएम के प्रयासों से सम्भव हो पाया है।
दरअसल, सरकार ने राज्य के प्रत्येक उपखण्ड मुख्यालय पर शारदे छात्रावास निर्माण की स्वीकृति जारी की थी। रायपुर उपखण्ड क्षेत्र का छात्रावास का निर्माण बर के बालिका स्कूल परिसर में किया जाना तय हुआ था। रमसा की देखरेख में ढाई साल पहले यहां सबंधित ठेकेदार के जरिये निर्माण शुरू करवा दिया था। लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की शिकायत व एसीबी की छापा कार्रवाई के बाद दस माह तक निर्माण अधूरा ही पड़ा रहा। छह माह पहले उसी ठेकेदार के जरिए निर्माण दोबारा शुरू कराया गया, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
दो साल से घर बैठी 100 से अधिक छात्राएं
गांव के आस-पास बालिका स्कूल नहीं है। यातायात साधनों का अभाव है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। ये वे छात्राए हैं, जिन्होंने कस्तूरबा आवासीय स्कूल में रहकर आठवीं कक्षा पास कर रखी है। आगे पढऩे के लिए छात्रावास की सुविधा नहीं होने से 100 से अधिक छात्राएं विवश होकर दो साल से अपने घर बैठी बर छात्रावास का निर्माण पूरा होने की राह देख रही है।
एसडीएम ने की पहल
ये हालात जब एसडीएम जैतारण मोहनलाल खटनावलिया के सामने आए तो उन्होंने इन छात्राओं के सपनों को पूरा करना की ठान ली। उन्होंने जैतारण व सोजत के शारदा छात्रावास सम्पर्क किया। इसके बाद रायपुर क्षेत्र की छात्राओं के अभिभावकों से सम्पर्क कर उन्हें प्रोत्साहित किया। इसके परिणामस्वरूप रायपुर क्षेत्र की जैतारण में 16 और सोजत में चार छात्राओं का वहां के शारदे छात्रावास में एडमिशन कराया है।
एडमिशन करवा उपलब्ध कराई सुविधा
रायपुर क्षेत्र में 100 से अधिक छात्राएं हॉस्टल के अभाव से शिक्षा से वंचित घर बैठी हंै। बर हॉस्टल का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ। मैंने रायपुर क्षेत्र की बीस छात्राओं का जैतारण व सोजत के शारदे छात्रावास में एडमिशन करवा दानदाताओं की मदद से जैतारण छात्रावास में सुविधाएं भी उपलब्ध करवा दी है। इससे अब ये छात्राएं आगे पढक़र अपने सपने साकार कर सकेगी।
मोहनलाल खटनावलिया, एसडीएम, जैतारण