पाली

बेटियों के बारे में यह जानकार मिलेगी बहुत खुशी…

बेटियों की कद्र, नौ साल से लगातार बढ़ रहा बालिका लिंगानुपात बेटी जन्म पर बजती है थाली, कटता है केक 55 गांवों में बेटों से भी ज्यादा जन्म ले रही बेटियां
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Jan 24, 2020
बेटियों के बारे में यह जानकार मिलेगी बहुत खुशी...
बेटियों के बारे में यह जानकार मिलेगी बहुत खुशी...

पाली . हिन्दी फिल्म ‘दंगल’ का एक संवाद ‘मेरी बेटी बेटे से कम है के...’ यह बताने के लिए काफी था कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं है। वे रेसलर बन सकती है तो हवाई जहाज भी उड़ा सकती है। इतना ही नहीं, सेना में जाकर हथियार चलाकर दुश्मनों के दांत तक खट्टे कर सकती है। हमारे जिले में भी अब बेटियों के प्रति बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां अब बेटियों के जन्म पर केक कटता है तो ढोल-थाली भी गूंजते हैं।

यह 55 गांव, जहां बेटों से भी ज्यादा बेटियां

खास बात ये है कि जिले में वर्ष 2011 से लगातार बालिका लिंगानुपात बढ़ रहा है। जिले में 55 गांव तो ऐसे हैं जहां बेटों से भी ज्यादा बेटियों का जन्म हो रहा है। इनमें जिले के बलाड़ा, खारड़ा, चामुंडेरी, जवाली, राजोला कलां, मणिहारी, जोजावर, बर, पनोता, सांडेराव, गुड़ा एंदला, निम्बोल, जवाली, आसरलाई, बेड़ल कलां, पाचेटिया, पावा, शिवतलाब, अटबड़ा, नाना, आऊवा, गिरी, देसूरी, रानी, बामनेरा, लुणावा, धनला, चाडवास, लाम्बिया, रायपुर, नारलाई, नाडोल, ढोला, बूसी, धाकड़ी, जैतारण, सादड़ी, खारची, कुशालपुरा, बेड़ा, लाम्बिया, गागुड़ा, बागोल, सियाट, जाडन, कुडक़ी, झीतड़ा, सेवाडिय़ा, बांता व पावटा शामिल है।

इस कारण बढ़ा लिंगानुपात

प्रत्येक माह की नौ तारीख को जिलास्तर व ब्लॉक स्तर पर महिला बाल विकास विभाग के तत्वावधान में बालिका जन्मोत्सव मनाया जाता है। क्षेत्र में जन्म लेने वाली बालिकाओं का एक साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान केक काटा जाता है। बालिका के लिए बेबी किट दिया जाता है तथा परिजनों को प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। इसके साथ ही पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पिछले कुछ वर्षों में प्रभावी कदम उठाए गए। इसके तहत डिकॉय ऑपरेशन करने, सोनोग्राफी सेंटरों का आकस्मिक निरीक्षण, सोनोग्राफी मशीन पर जीपीएस सिस्टम लगाने सहित डाटा जांच के लिए एक्टिव ट्रेकर लगाने जैसे कई प्रभावी कदम उठाए गए। इसके चलते भू्रण ***** परीक्षण जिले में अब न के बराबर हो रहा है।

लोग भी हो रहे जागरूक

वर्ष 2011 में प्रति एक हजार बच्चों पर 899 बेटियां थी। बालिका जन्मोत्सव को लेकर जिले में जागरूकता अभियान चलाने के कारण पिछले कुछ वर्षों से निरन्तर बालिका लिंगानुपात मेें इजाफा हुआ। लोग भी जागरूक हो रहे है।

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जागरूकता से आया बदलाव

वर्तमान में एक हजार बच्चों पर 950 बेटियों का जिले में जन्म हो रहा है। बेटी जन्मोत्सव, बेटियां हैं अनमोल अभियान से जिले भर में जागरूकता आई, जिसके सुखद समाचार मिले।

- आर.पी. मिर्धा, सीएमएचओ, पाली

Published on:
24 Jan 2020 05:29 am