राजस्थान के मगरा क्षेत्र के गांव के लोगों ने अपना खुद का वाटर सप्लाई सिस्टम विकसित कर लिया। ग्रामीणों ने खुद के खर्चे से सामूहिक कुएं से घरों तक पाइप लाइन लगा ऊंचाई पर बने घरों तक पानी पहुंचा दिया।
पाली/रायपुर मारवाड़। अरावली पर्वतमाला के बीच बसे गांवों के लोगों का जीवन भी आसान नहीं है। उन्हें हर आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ता है। चाहे वह आवागमन के साधन हों, बिजली हो या पानी। इन पहाड़ों क्षेत्रों के बीच बसी आबादी में सभी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में उन्हें अपने स्वयं के स्तर पर प्रयास कर आवश्यकताओं की पूर्ति करनी पड़ती हैं। आवश्यकता अविष्कार की जननी है।
सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत योजना बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में घर घर नल कनेक्शन लगाए गए हैं। मगरा क्षेत्र में बसी आबादी में बने ग्रामीणों के घर ऊंची नीची पहाड़ियों पर स्थित होते हैं। ऐसे में सरकारी मिशन की योजना की पाइप लाइन यहां पहुंच पाना असंभव सा है। इन पहाड़ों पर ऊंचाई पर बसी आबादी के लोगों को दूर दूर स्थित कुओं, हैंडपंपों से सिर पर रखकर पीने का पानी लाना पड़ता था। रोजाना सिर पर मटके रख ऊंचाई पर बने घरों तक परिवार के साथ मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था कर पाना काफी परेशानी भरा था। ऐसे में मगरा क्षेत्र के गांव के लोगों ने अपना खुद का वाटर सप्लाई सिस्टम विकसित कर लिया।
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ग्रामीणों ने खुद के खर्चे से सामूहिक कुएं से घरों तक पाइप लाइन लगा ऊंचाई पर बने घरों तक पानी पहुंचा दिया। अब उन्हें सिर पर मटके उठाकर ऊंचाई पर चढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। बस बटन दबाते ही घर तक पानी पहुंच जाता है। सरकारी नलों में तो निर्धारित समय पर ही पानी मिल पाता है जबकि ग्रामीणों की इस स्कीम में जब भी जरूरत हो, तुरंत ही ताजा पानी उपलब्ध हो जाता है।
उपखण्ड से सटे हुए ब्यावर जिले के एक गांव समापा के ग्रामीणों ने अपनी सुविधा के लिए विकसित किए सिस्टम में दूर से देखने पर बिजली के तारों जैसी पेड़ों पर लटकती हुई पाइप लाइनें बिछा रखी हैं। पहाड़ियों के बीच यहां के निवासियों का एक सामूहिक कुआं स्थित है। जिसके चारों ओर आधे से एक किलोमीटर दूर दूर तक ऊंची ऊंची जगहों पर घर बने हुए हैं। इन घरों में रहने वाले लोगों ने अपनी सुविधा के लिए खुद के खर्चे से कुएं से घरों तक अलग अलग पाइप लाइनें लगा दी।
गांव में जितने घर हैं कुएं में उतनी मोटर और उससे जुड़ी हुई उतनी ही पाइप लाइनें बिछा रखी हैं। जो दूर से बिजली के तारों जैसी दिखाई देती हैं। पाइप के साथ घर से कुएं तक बिजली की केबल लगा कर कुएं में मोटरें लगा दी। जिसको चालू करने का बटन उन्होंने अपने घर में लगा रखा है। जरूरत पर घर से बटन दबाते ही कुएं में लगी मोटर चालू हो जाती हैं और घर तक पानी पहुंच जाता हैं। अब तक ऐसा सिस्टम पहाड़ी क्षेत्र के कई गांवों में देखने को मिल रहा है।