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प्रतिभा : अभावों में अटका होनहार के आसमान छूने का सपना

-धावक विनोद सीरवी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीत चुका है स्वर्ण पदक-आर्थिक हालात ऐसे कि नहीं खरीद सकता स्पोर्ट-किट
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Nov 30, 2018
Vinod Sirvi has won gold medal in national
प्रतिभा : अभावों में अटका होनहार के आसमान छूने का सपना

चौपड़ा। कहते हैं प्रतिभा अभावों में ही निखरती है। ऐसी प्रतिभा है क्षेत्र के खारीयानींव निवासी धावक विनोद सीरवी, जिसके पास स्पोर्ट किट खरीदने का पैसा न होने के बावजूद पढ़ाई में अव्वल रहते हुए दौड़ की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का जलवा दिखाया। पिता खुमाराम खेती कर घर का गुजारा चलाते हैं, जबकि माता बचपन में साथ छोडकऱ चली गई। पिता जैसे-तैसे घर चलाकर विनोद के पढ़ाने का जिम्मा संभाल रहे थे कि परिस्थितियों ने फिर पलटा खाया और 2011 में हादसे में पिता ने अपना एक हाथ खो दिया। फिर भी हार नहीं मानते हुए पिता ने पुत्र को पढ़ाने व खेल में आगे बढ़ाने का हौसला देते रहे। इसी का परिणाम है कि विनोद अध्ययन के साथ ही खेलों की कई प्रतिस्पर्धाएं जीत चुका है।

यहां तक कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद बुलंद हौसले के दम पर ्र2017 में सोजत में आयोजित हुई ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया और 100 मीटर दौड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यहां से जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित होकर 100 मीटर दौड़ में तीसरा स्थान प्राप्त किया। दौड़ में अपने हुनर को दिखाने के लिए विनोद स्पोट्र्स फे डरेशन ऑफ इंडिया की ओर से मार्च 2018 में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता भरतपुर में भाग लेकर 200 मीटर दौड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 17 अगस्त 2018 को अलवर के नीमराना में आयोजित आल इंडिया एथलेटिक्स टीएए स्पोट्र्स चैंम्पियनशिप में भाग लेकर 100 व 200 मीटर की दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 23 अक्टूबर को पूना (महाराष्ट्र) में आयोजित हुई मिशन ओलंम्पिक एसोसिएशन खेल संघ में भाग लेकर 100 मीटर की दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्र्वण पदक जीता।

इसकेबाद 5 नवम्बर को इन्दौर (मध्यप्रदेश) में आयोजित हुई फे स्टिवल मैराथन में भाग लिया और 42 किलोमीटर की दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया। धावक विनोद का सपना है जनवरी 2019 में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने वाली खेलो इंडिया में भाग लेना और ओलम्पिक खेलों में भारत का प्रनिनिधित्व करना है, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते उसे न तो अच्छे प्रशिक्षक मिल पाते हैं और न ही अच्छे संसाधन सुलभ हो पा रहे हैं। खेल की ऐसी प्रतिभा के पंख तभी लग सकते हैं, जब खेलप्रेमी दानदाता आकर ऐसी नैसर्गिक प्रतिभा को उचित संरक्षण एवं संबलन प्रदान करे।

Published on:
30 Nov 2018 03:40 pm