
पाली/जैतारण। सम्पत्ति हड़पने के लिए पहले पति की बेटी की मौत के बावजूद उसके पिता के भाइयों के खिलाफ अपहरण का झूठा मामला दर्ज करवाने व बेटी को दस्तयाब करने के लिए जोधपुर हाइकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की झूठी याचिका लगाने के मामले का जैतारण थाना पुलिस ने मंगलवार को राजफाश कर दिया।
दो अपहरण के मुकदमे, दो याचिका, पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा के अनुसार जैतारण निवासी पपली का विवाह गोमाराम के साथ बीस साल पूर्व हुआ था। गोमाराम की मौत हो गई। इधर, गोमाराम की मौत के बाद दिलखुश उर्फ अंजली नाम की पुत्री को पपली ने जन्म दिया। इसके बाद पपली ने अमराराम कुमावत से नाता कर लिया। दिलखुश उर्फ अंजली के नाम बिचर्डी में अपने पिता गोमाराम की पुश्तैनी 3 बीघा जमीन आई हुई थी, उस जमीन मे पूर्व मे पपली का नाम दर्ज था, लेकिन पूर्व सुसराल वालों ने उसके नाम का विरोध करने पर केवल दिलखुश के नाम जमीन दर्ज हुई, लेकिन नाबालिग होने तक उसके नाना पपली के पिता हेमाराम का नाम दर्ज किया गया। इस सम्पत्ति को पपली हड़पना चाहती थी। दिलखुश की मौत 23 दिसम्बर 2018 को हो गई। पपली ने 7 जुलाई 2019 को बिचर्डी गांव ओमाराम, ओगडऱाम, कौशल्या, समली पर अपहरण कर ले जाने का झूठा मामला दर्ज करवाया। इधर, 21 अगस्त 2019 को बिचर्डी के बेरा बावड़ी निवासी ओगडऱाम ने उसके भाई गोमाराम की पुत्री दिलखुश का अमरराम, हेमाराम, बाबूलाल, माणकराम के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज करवाया।
पपली ने हाइकोर्ट में इसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी लगाई। इधर, ओगडऱाम पक्ष की ओर से भी पपली के खिलाफ अमराराम के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका लगाई गई। हाइकोर्ट पर पाली पुलिस को बच्ची को बरामद कर पेश करने के आदेश दिए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि दिलखुश की गुजरात में मौत हो चुकी है। गुजरात के मीरा दातार श्मशान घाट के रजिस्टर मे उनका नाम दर्ज है। सरस्वती मुक्तिधाम सिद्धपुर 23 दिसम्बर 2018 को अन्तिम संस्कार कर उसके परिजन सूरत के हरिकृष्णा रेजीडेन्सी मे जाकर रहने लगे।
अस्पताल से बनवाए झूठे कागजात
दिलखुश की मौत के बाद पपली देवी व अमराराम ने दिलखुश के इलाज करवाने को लेकर उंजा के नूतन हास्पिटल में 15 जनवरी 2019, 26 फरवरी 2019 को जैतारण चिकित्सालय में, 6 जुलाई 2019 को उंझा के नूतन अस्पताल में बीमारी का उल्लेख कर मरीज पर्ची कटवाई गई और झूठे कागजात बनवाए।
तीन संतान की मौत के मामले में जा चुकी हैं जेल
पपलीदेवी ने सौतेली संतान मेे लीलाधर की 10 मई 2009 को संदिग्ध हालत मे मौत के मामले मे जेल गई, लेकिन जमानत मिलने पर छूट गई। अमराराम की संतान व पपली की सौतेली संतान शोभा की 27 जनवरी 2010 को संदिग्ध हालत मे मौत हो गई। शोभा की मौत को लेकर पुलिस ने धारा 304 व 120 बी मामला दर्ज किया। उसके बाद विष्णुप्रिया उर्फ मतिया की 13 फरवरी 2012 मे मौत हो गई। जिसको लेकर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। इसमें पति अमराराम व पपलीदेवी दोनों को जेल हुई। उसके बाद जमानत पर पुन: रिहा हुए।
इस टीम ने किया राजफाश
जैतारण थानाधिकारी सुरेश चौधरी, पुलिस निरीक्षक भगाराम, उप निरीक्षक राजदीपेन्द्र सिंह सहित पुलिस की टीम ने इस मामले का राजफाश किया।
मासूम बच्चों से खुला राज
पपली देवी के जैतारण मे अमराराम के साथ रहने पर दो संतान पैदा हुई। जिसमे करिश्मा 11 वर्ष व मोहित 8 वर्ष हैं। अपहरण के मामले में पुलिस ने दोनों बच्चों को विश्वास में लेकर पूछने पर गुजरात के सूरत व मीरा दातार में साथ होने का जिक्र करने पर पुलिस को शक हुआ। पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो दिलखुश की मौत का राज खुला।