
-तापमान बढऩे से लू की चपेट में आने की आशंका
-बांगड़ अस्पताल में लू-तापघात के मरीजों के लिए बेड आरक्षित
गेस्ट राइटर - एच.एम. चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सक, बांगड़ अस्पताल, पाली
पाली। शहर सहित जिले भर में इन दिनों तेज गर्मी का प्रकोप जारी है। पारा 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द पहुंच गया है, जिससे दुपहरी में तो लू के थपेड़े से लगते प्रतीत होते हैं। जरा सी चूक लोगों को बीमारियों की चपेट में ले जा सकती है। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों के साथ वृद्ध, गर्भवती महिलाओं, श्रमिकों, खिलाडिय़ों व यात्रियों के लू -तापघात की चपेट में आने का है। चिकित्सा विभाग का मानना है कि लू के लक्षण व उससे बचाव व उपचार की सामान्य जानकारी सभी को होनी चाहिए।
बांगड़ अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक एच.एम. चौधरी ने बताया कि बांगड़ अस्पताल में तीनों मेडिकल वार्ड में दो-दो बेड लू-तापघात के मरीजों के लिए आरक्षित किए है। तीनों वार्ड एसी है। साथ ही मरीजों के गीले कपड़े से स्पंज करने के लिए बर्फ व दवाइयों की भी व्यवस्था कर रखी है।
लू व तापघात के लक्षण
- सिर का भारीपन व सिरदर्द।
- अधिक प्यास लगना व शरीर में भारीपन के साथ थकावट।
- जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढऩा।
- शरीर का तापमान अत्यधिक हो जाना व पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना व त्वचा का सूखा होना।
- अत्यधिक प्यास का लगना, बेहोशी जैसी स्थिति का होना।
बचाव के उपाय
- सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक तेज गर्मी से बचने के लिए छायादार ठंडे स्थान पर रहने का प्रयास करें।
- तेज धूप में निकलना आवश्यक हो तो पहले ताजा भोजन कर ले और उचित मात्रा में ठंडे जल का सेवन करें।
- थोड़े अन्तराल के बाद ठंडे पानी, शीतल पेय, छाछ, ताजा फलों का रस का सेवन करते रहें।
- छाते का उपयोग करें अथवा कपड़े से सिर व बदन को ढककर निकले।
- धूप में कठिन काम करने वाले श्रमिक आदि कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबन्ध रखें।
लू तापघात का उपचार
- लू-तापघात से प्रभावित रोगी को तुरन्त छायादार ठंडे स्थान पर लिटा दे।
- रोगी की त्वचा को गीले कपड़े से स्पंज करते रहे तथा रोगी के कपड़े ढीले करें।
- रोगी होश में हो तो उसे ठंडे पेय पदार्थ दें।
- रोगी को तत्काल नजदीक के चिकित्सा संस्थान में उपचार के लिए ले जाए।