बफर जोन क्षेत्र में घूम रहे बाघों की निगरानी के लिये बनाए जाएंगे वांच टॉवर, मानव व वन्य प्राणियों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए शहर की सीमा से लगे वन क्षेत्रों में होगी फेन्सिंग। पन्ना टाइगर रिजर्व के इतिहास में सबसे अधिक करीब 40 हुई बाघों की संख्या।
पन्ना. पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की तेजी से बढ़ रही संख्या के चलते बाघ कोर क्षेत्र ने निकलकर बफर जोन क्षेत्र और शहरी सीमा के आसपास तक जा रहे हैं। इससे पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों की निगरानी के करने क ेलिये बफर जोन के क्षेत्र में वाच टॉवर बनाएगा।
इसके साथ ही मानव व वन्य प्राणियों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए शहर की सीमा से लगे वन क्षेत्रों में ऊंची फेंसिंग की जाएगी। यह निर्णय क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व कार्यालय के सभागार में फ्रेंडस ऑफ पन्ना के तत्वाधान में अयोजित बैठक में लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता अपर प्रधान मु य वन संरक्षक एवं सदस्य सचिव मप्र जैव विविधता बोर्ड आर.श्रीनिवास मूर्ति ने की। बैठक में पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक केएस भदौरियाए , डीएफओ उत्तर नरेश सिंह यादव, डीएफओ दक्षिण मीना मिश्रा, एसपी विवेक सिंह, उपसंचालक पन्ना टाइगर रिजर्व वासु कन्नौजिया सहित फ्रेंडंस आफ पन्ना के सदस्यों सहित वन अधिकारी शामिल रहे।
अपर प्रधान मु य वन संरक्षक एवं सदस्य सचिव मप्र जैव विविधता बोर्ड आर.श्रीनिवास मूर्ति ने यहां मौजूद अधिकारियों को सुरक्षा और वन प्रबंधन से महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा , पन्ना टाइगर रिजर्व पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुका है। बाघों की आबादी बढ़ाने के लिये कई देश पन्ना के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। इसलिये यह हमारी जवाबदारी है कि हम यहां के बाघों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करें।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की तादाद 40 की सं या को पार कर गई है। इससे अब पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से कई बाघ बाहर निकलकर बफर व रेगुरल फारेस्ट में विचरण करते हुये अपने लिए अनुकूल टेरीटोरियल में वन क्षेत्र की तलाश कर रहे हैं। इन हालातों के चलते कोर क्षेत्र से बाहर निकल रहे बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वन अमले के लिये बड़ी चुनौती साबित हो रही है।
बफर में वाच टॉवरों से होगी बाघों की निगरानी
बाघें की लगातार बफर क्षेत्र में साइटिंग को देखते हुए जिस प्रकार से टाइगर रिजर्व में बाघें के मॉनीटरिंग की व्यवस्था है, ठीक वैसी ही व्यवस्था बफर क्षेत्र में भी विकसित की जाएगी। क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व केएस भदौरिया ने बताया, इसके लिये बफर क्षेत्रों में वाचिंग टावर भी बनाए जाएंगे। बाघों की सं या बढऩे से कई बाघ कोर से बाहर बफर और रेगुरल फारेस्ट में निकल रहे हैंद्ध जिससे मानव व वन्य प्राणी के बीच टकराव की स्थिति वन सकती है।
इस संभावना को रोकने के लिये हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिए वाच टॉवर बनाए जाने के साथ ही मानव व वन्य प्राणियों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए पन्ना शहर की सीमा को छूने वाले वन क्षेत्रों में फेन्सिंग लगाने का भी निर्णय लिय गया, जिससे टकराव के हालात रोके जा सकें। बैठक में उत्तर व दक्षिण वन मंडल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में शिकार की हुई घटनाओं पर चिन्ता जाहिर की गई।
बैठक में वन्य प्राणी संरक्षण को लेकर मिले अहम सुझाव
वन्य प्राणियों के बेहतर तरीके से संरक्षण के उद्देश्य को लेकर आयोजित इस बैठक में इस समस्या को फ्रेंडस आफ पन्ना के सदस्यों ने प्रमुखता से उठाया और यह बताया गया कि कई मामलों में मु य आरोपी बच जाते हैं और निर्दोष गरीबों को फंसा दिया जाता है। शहर के आस-पास निवास कर रहे पारधी समुदाय के लोगों पर नजर रखने की भी सलाह दी। बैठक में श्यामेन्द्र सिंह , हनुमन्त सिंह व टाइगर रिजर्व के संस्थापक सदस्य व पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह ने वन व वन्य प्राणी संरक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।