हीरापुर टपरियन में नजर नहीं आतीं सरकार की योजनाएं, भरी बरसात खुली झोपड़ी में वृद्ध दंपत्ति, वृद्धावस्था पेंशन और सरकारी राशन ही सिर्फ सहारा
पन्ना। जिले में पात्र हितग्राहियों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर हीरापुर टपरियन में एक बुजुर्ग दंपति खुली झोपड़ी में रह रहे है। भागीरथ पिता नेकू आदिवासी (60) संतानों की उपेक्षा से दयनीय हालातों में है। हीरापुर टपरियन लगभग एक हजार लोगों की बस्ती है। जहां भागीरथ का परिवार झोपड़ी बना कर रहता है।
बुजुर्ग दंपत्ति वृद्धावस्था पेंशन और सरकारी राशन के सहारे है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना सहित शासन की तमाम योजनाएं उसके लिए बेमानी हैं। दंपति ने जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाए। मगर, मदद नहीं मिली। सरपंच के पास गए वहां भी कार्रवाई नहीं हुई।
गुणवत्ताहीन शौचालय
झोपड़ी में दंपति के लिए पंचायत ने शौचालय बनवाया पर, घटिया सामग्री लगाने से दरवाजा उखड़ गया। बताया, दो माह पहले ही शौचालय बनवाया गया है। लेकिन उपयोग लायक नहीं है। हीरापुर में हो रहे शौचालय निर्माण की प्रशानिक अधिकारियों ने जांच नहीं की। और, पंचायत व गांव को ओडीएफ कराने की तैयारी में है। जिनके घरों में शौचालय बने हुए है, वो भी उपयोगी नहीं है। ग्रामीण खुले में शौच जाते है। स्वच्छता अभियान के तहत जिले को अक्टूबर में ओडीएफ करने की तैयारी है।
बारिश में बंद हो जाता हीरापुर का मार्ग
जिला मुख्यालय से लगे हीरापुर के लिए कच्ची सड़क होने से वह बारिश में बंद हो जाती है। ग्रामीणों के पास घरों में ही रहने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होता। पक्की सड़क निर्माण के लिए प्रशासन व ब्लाक के अधिकारियों के लगाई गई मगर, कार्रवाई नहीं हुई। सप्ताह भरगिट्टी डाल दी जिससे पैंदल निकलने में भी परेशानी होने लगी।
गांव में अधिकांश आदिवासी परिवार
कोई बीमार हो जाए तो मुख्यमार्ग तक पहुंचाने दो किलोमीटर का सफर करना पडता है। गौरतलब है कि, गांव में अधिकांश आदिवासी परिवार रहते हैं। जो मजदूरी के लिए शहर आते-जाते हैं। माध्यमिक व महाविद्यालय की पढ़ाई करने वाले छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूली बच्चे भी नहीं जा पाते है।
गांव में शौचालय व पीएम आवास का निरीक्षण करूंगी। साथ ही, गांव को शासन की योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा।
तपस्या जैन, सीइओ जनपद पन्ना