
Panna Chita Andolan Update: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना में विस्थापितों का चिता आंदोलन का सत्याग्रह 16वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों के अनुसार, रविवार-सोमवार की रात को प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचा, जहां सत्याग्रह कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने मारपीट और अभद्रता की। आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस कार्रवाई के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल किया। रविवार-सोमवार रात की कार्रवाई के बाद आंदोलन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई।
अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों और न्याय की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस कार्रवाई के विरोध में उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया है और कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने पुलिस कार्रवाई में महिलाओं के साथ कथित अभद्रता और मारपीट की घटना पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सत्याग्रह का रास्ता सत्य, अहिंसा और संविधान में विश्वास पर आधारित है और वे किसी भी दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। चिता आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि 16 दिनों से चल रहे सत्याग्रह के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला नहीं टूटा है।
पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज करने की बात कही गई है। अमित भटनागर ने कहा कि वे अन्याय के सामने नहीं झुकेंगे और अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को न्याय दिलाना है।
आंदोलन से जुड़े अमित भटनागर ने कहा कि जिस परियोजना की प्रक्रिया को 15 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, उसके बावजूद प्रभावित परिवारों के मुआवजा और पुनर्वास के मामले लंबित रहना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य का अपने ही बनाए कानून का पालन न करना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यदि कानून प्रभावितों के अधिकार और पुनर्वास की व्यवस्था करता है तो डूब क्षेत्र में आने से पहले उसका पालन सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रभावितों की सूची, मुआवजा, पुनर्वास और संपत्तियों के मूल्यांकन से जुड़े कई मामले अभी भी लंबित हैं।