पटना

PK की जनसुराज में भगदड़! बांकीपुर-कुम्हरार के बड़े नेता BJP में, प्रशांत किशोर की राह कितनी मुश्किल?

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जनसुराज के कई प्रमुख नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति को झटका माना जा रहा है। वहीं, बीजेपी इसे संगठनात्मक मजबूती और डैमेज कंट्रोल के तौर पर देख रही है।
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Jul 15, 2026
Bankipur By Election
प्रशांत किशोर(फोटो-IANS)

Bankipur By Election:  बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में जनसुराज के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने वालों में प्रमुख नाम के.सी. सिन्हा का है। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी बुधवार को जनसुराज छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से पटना के शहरी इलाकों में जनसुराज के चुनावी समीकरण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रशांत किशोर ने वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में के.सी. सिन्हा को कुम्हरार विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। उनके अलावा मनेर विधानसभा से जनसुराज के प्रत्याशी रहे गोपाल सिंह और दीघा विधानसभा से उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया। बिट्टू सिंह ने कुछ समय पहले ही एक पत्र जारी कर जनसुराज छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा कर दी थी।

BJP का डैमेज कंट्रोल

बीजेपी अपने प्रत्याशी को लेकर जिस तरह की चुनौती का सामना कर रही थी, उसके बीच के.सी. सिन्हा का जनसुराज छोड़कर पार्टी में शामिल होना बीजेपी के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह धारणा है कि प्रत्याशी को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब के.सी. सिन्हा की क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक प्रभाव का लाभ उठाने की कोशिश करेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भी कहना है कि के.सी. सिन्हा को साथ जोड़कर डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि प्रत्याशी नीरज सिन्हा को लेकर परंपरागत वोटरों के बीच बनी नाराजगी या असमंजस को कम किया जा सके और उन्हें फिर से पार्टी के पक्ष में गोलबंद किया जा सके।

सवर्ण वोट बैंक पर पीके की नजर

बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी की जीत का आधार उसका सवर्ण वोट बैंक माना जाता है। इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तहत प्रशांत किशोर की टीम मतदाताओं के बीच भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर और यूजीसी नियमों जैसे मुद्दों को उठा रही है। प्रशांत किशोर की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि कोई भी पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं होती, बल्कि सभी दल वोट की राजनीति करते हैं। जन सुराज की टीम भूमिहार (7 फीसदी), ब्राह्मण (7 फीसदी) और राजपूत (5 फीसदी) वोटरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। टीम का मानना है कि अगर बीजेपी का यह परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होता है तो चुनावी समीकरण बदल सकता है। इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने बुधवार को के.सी. सिन्हा को पार्टी में शामिल कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाया। पार्टी को उम्मीद है कि के.सी. सिन्हा के जुड़ने से न केवल क्षेत्र में उसका संगठन मजबूत होगा, बल्कि युवाओं के बीच भी उसकी पकड़ और समर्थन बढ़ेगा।

बूथों पर फोकस

बीजेपी अपनी सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले बूथ संगठन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत प्रत्येक बूथ की जिम्मेदारी अनुभवी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। इस अभियान में विधायक, सांसद, जिला और मंडल पदाधिकारियों के साथ संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को भी लगाया गया है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 422 मतदान केंद्र हैं। पार्टी का दावा है कि प्रत्येक बूथ पर उसके 100 से अधिक सक्रिय और प्रशिक्षित कार्यकर्ता मौजूद हैं। वहीं, बीजेपी का मानना है कि जन सुराज का संगठन अभी बूथ स्तर तक पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाया है और कई स्थानों पर बूथ समितियों का गठन भी अधूरा है।

Updated on:
15 Jul 2026 04:51 pm
Published on:
15 Jul 2026 03:53 pm