
Bankipur By-Polls: पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए बुधवार (30 जुलाई) को मतदान होना है। मतदान से पहले सभी प्रत्याशियों ने बांकीपुर के करीब 3.79 लाख मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट देने की अपील की। मंगलवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। इस दौरान सभी दलों और प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी। बांकीपुर की सड़कों पर दिनभर रोड शो और जनसंपर्क अभियान चलते रहे।
भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, भोजपुरी अभिनेता एवं सांसद मनोज तिवारी, अभिनेता पवन सिंह और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने रोड शो और जनसंपर्क किया। वहीं, राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रचार के अंतिम दो दिनों में पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने कई इलाकों में रोड शो और जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं से समर्थन मांगा। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी प्रचार के अंतिम दिन व्यापक जनसंपर्क कर चुनावी माहौल को धार देने की कोशिश की।
इस उपचुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा, प्रशांत किशोर की राजनीतिक साख और तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति तीनों दांव पर हैं। यही वजह है कि सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत मैदान में उतार दी है। भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक, व्यापारी वर्ग, मध्यम वर्ग और मजबूत बूथ संगठन के भरोसे चुनाव लड़ रही है। साथ ही पार्टी अपने जातीय समीकरणों को भी मजबूत बनाए रखने में जुटी है। दूसरी ओर, जन सुराज की नजर भी इन्हीं वोटरों के साथ-साथ बदलाव चाहने वाले मतदाताओं पर है। इसलिए भाजपा ने अपने लगभग सभी प्रमुख नेताओं और मंत्रियों को चुनाव प्रचार में उतारा। वहीं, जन सुराज युवा मतदाताओं, पहली बार मतदान करने वाले वोटरों और बदलाव की चाह रखने वाले लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ राजद अपने पारंपरिक 'MY (मुस्लिम-यादव)' समीकरण के भरोसे चुनावी मैदान में है।
हालांकि उपचुनावों में आमतौर पर मतदान प्रतिशत कम रहता है, लेकिन इस बार सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर टिकी है। यदि मतदान अपेक्षा से अधिक होता है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। खासकर युवा मतदाताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों की दिलचस्पी सबसे अधिक है।
युवा मतदाताओं का मतदान व्यवहार पारंपरिक वोटरों से अलग माना जाता है। वे सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहते हैं, नए मुद्दों पर तेजी से अपनी राय बनाते हैं और किसी एक राजनीतिक दल के स्थायी समर्थक नहीं माने जाते। यही कारण है कि 'Gen Z' को किसी भी दल का तयशुदा वोट बैंक नहीं माना जाता। चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों, रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक संदेशों के आधार पर उनका रुख बदल सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर में युवा मतदाता चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करते हैं।