
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब पुलिस ने भी स्वीकार किया है कि घटना में कुछ स्तर पर चूक हुई है। हालांकि यह गलती किसकी थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। मामले की जांच शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है।
एनकाउंटर के बाद से भोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बचते रहे हैं। अब तक थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, लेकिन भरत भूषण तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों की नाराजगी मुख्य रूप से संबंधित डीएसपी को लेकर है, जिनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों का कहना है कि एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसी वजह से गांव में लोगों के बीच नाराजगी और असंतोष बना हुआ है।
भरत भूषण तिवारी के 28 वर्षीय भाई चंदन तिवारी ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में ज्यादा जांच की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भरत भूषण तिवारी किस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे थे और उन्हें किस तरह प्रताड़ित किया जा रहा था, इससे जुड़ी कई बातें उनके फेसबुक पोस्ट और लाइव वीडियो में दर्ज हैं। उनका कहना है कि यदि इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर ली जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
चंदन तिवारी ने मांग की कि संबंधित डीएसपी को सबसे पहले गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएसपी ने व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण उनके भाई की हत्या करवाई। उनका कहना था कि यदि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर उनकी मौत एनकाउंटर में कैसे हुई।
मृतक के भाई ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उनके भाई को धोखे से मारा। चंदन तिवारी के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने भरत भूषण तिवारी से कहा था, “भारत जी, हमें आपसे आत्मसमर्पण की उम्मीद थी।” उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया, लेकिन कुछ दूरी पर ले जाने के बाद अचानक धक्का देकर गोली मार दी गई।