
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सम्राट सरकार ने शुक्रवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। सरकार ने भोजपुर जिले के जगदीशपुर के एसडीओ (अनुमंडल पदाधिकारी) संजीत कुमार को उनके पद से हटा दिया। उन्हें अगले आदेश तक सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। वहीं, तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश शर्मा को भी पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। भरत तिवारी एनकाउंटर के समय राजेश शर्मा एसडीपीओ और संजीत कुमार एसडीओ के पद पर तैनात थे। परिजनों ने दोनों अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजेश शर्मा के खिलाफ तो भरत तिवारी के परिजनों की शिकायत पर हत्या का मामला भी दर्ज है। खास बात यह है कि यह दोनों कार्रवाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद की गई।
भरत तिवारी बिलौटी गांव के पास बसाए जा रहे बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे थे। वह इस मामले में प्रशासन की कथित लापरवाही को लेकर आवाज बुलंद कर रहे थे। परिजनों का आरोप है कि भरत ने तत्कालीन एसडीओ से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। परिवार का यह भी आरोप है कि एक बार एसडीओ कार्यालय में तैनात एक गार्ड ने भरत के साथ मारपीट की थी।
इसके बाद भरत तिवारी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन, विशेषकर एसडीओ, के खिलाफ बयानबाजी और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे थे। पुलिस का कहना था कि इसी क्रम में उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई की गई, जिसके दौरान 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में उसे गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वहीं, परिजनों का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। परिवार लगातार इस घटना को फर्जी एनकाउंटर बताता रहा है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान भी परिजनों ने यही मांग दोहराई। इसके कुछ ही घंटों बाद सरकार ने एसडीओ को हटाने और डीएसपी को पुलिस मुख्यालय भेजने का आदेश जारी कर दिया।