Bihar Politics नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच संजय झा ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है।
Bihar Politicsनीतीश कुमार अपने लंबे संसदीय जीवन में लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। अब वे चौथे विधायी सदन राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। उनके राज्य सभा के लिए निर्वाचित होने के साथ ही यह चर्चा तेज हो गई है कि उनके बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? चर्चाओं के अनुसार, नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद बीजेपी के कोटे में जा सकता है। इसको लेकर एनडीए के भीतर मंथन का दौर भी शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस मुद्दे पर सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर विचार-विमर्श कर चुकी है, लेकिन अभी तक किसी नाम का खुलासा नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार अप्रैल के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। इसके बाद ही नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने की संभावना है।
इधर, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि नीतीश कुमार के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। इस पर फैसला मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ समाप्त होने के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि एनडीए के घटक दलों की बैठक में यह तय किया जाएगा कि अगला मुख्यमंत्री किस दल का होगा और कौन इस पद की जिम्मेदारी संभालेगा। साथ ही, इस मामले में नीतीश कुमार के सुझाव पर भी विचार किया जाएगा। संजय झा ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक दल की नहीं, बल्कि एनडीए की सरकार होगी, इसलिए निर्णय भी सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
हम (से) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला एनडीए की बैठक में होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार की पसंद का ही व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा। मांझी ने आगे कहा कि बिहार का जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उन्हें खुशी होगी। उन्होंने याद दिलाया कि उन्हें भी नीतीश कुमार ने ही मुख्यमंत्री बनाया था और अब भी वही तय करेंगे कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
जदयू के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार अप्रैल में मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि उन्हें 30 मार्च से पहले ही राज्य सभा की सदस्यता ग्रहण करनी होगी। चूंकि वे 16 मार्च को राज्य सभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए उनके पास निर्णय लेने के लिए करीब 14 दिन का समय है। इससे यह संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इससे पहले बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी। हालांकि, राज्य सभा की सदस्यता लेने के बाद भी वे कुछ दिनों तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं। इस मामले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि नीतीश कुमार फिलहाल मुख्यमंत्री हैं और राज्य सभा के लिए निर्वाचित होना उनकी इच्छा का विषय है कि वे कब तक इस पद पर बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद भाजपा, जदयू और पूरा एनडीए मिलकर नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला करेगा। शाहनवाज हुसैन ने आगे कहा कि बिहार का जो भी नया मुख्यमंत्री होगा, वह जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरेगा।