पटना

खान सर विवाद के बीच सम्राट सरकार का बड़ा एक्शन! अब हर छात्र का डेटा होगा प्रशासन के पास, स्कूल टाइम में कोचिंग पर रोक

बिहार सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर सख्ती करते हुए सभी संस्थानों के लिए छात्रों का पूरा डेटा जिला प्रशासन को देना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही स्कूल और कॉलेज के समय में कोचिंग क्लास चलाने पर रोक लगा दी गई है।

2 min read
Jun 09, 2026
Samrat Choudhary CM BIHAR
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (सोर्स: ANI)

खान सर और रौशन आनंद से जुड़े कोचिंग विवाद के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कोचिंग संस्थानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्कूल समय के दौरान कोचिंग के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है और कोचिंग में पढ़ने वाले सभी छात्रों का पूरा विवरण संबंधित प्रशासन के साथ साझा करना अनिवार्य कर दिया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए शिक्षा विभाग को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

कोचिंग संस्थानों पर सख्ती, डेटा देना अनिवार्य

सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर लिखा कि बिहार के सभी कोचिंग संस्थानों को अब अनिवार्य रूप से अपने यहां पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं की पूरी जानकारी संबंधित जिला प्रशासन के साथ साझा करनी होगी। कोई भी कोचिंग संस्थान छात्रों से जुड़ा डेटा छिपा नहीं सकेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और निगरानी प्रणाली और अधिक मजबूत बनेगी।

स्कूल टाइम में कोचिंग पर रोक

दरअसल, सरकार ने यह फैसला इस उद्देश्य से लिया है कि स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की नियमित कक्षाएं प्रभावित न हों। सरकार के निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि स्कूलों और कॉलेजों के निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोई भी कोचिंग संस्थान अपनी कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेगा। हालांकि, यह नियम उन छात्रों पर लागू नहीं होगा, जो अपनी स्कूली या कॉलेज शिक्षा पूरी कर चुके हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

कोचिंग व्यवस्था पर बनेगा नया फ्रेमवर्क

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इस पूरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नई और सख्त नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

Updated on:
09 Jun 2026 09:05 pm
Published on:
09 Jun 2026 08:49 pm