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Bihar Politics: बिहार में फिर साथ आएंगे विपक्षी दल, जानें क्या है महागठबंधन का पूरा प्लान

दिल्ली में मंथन: बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन टूट की कगार पर पहुंच गया था, लेकिन अब इसे फिर से एकजुट करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस और राजद के बीच पहले बयानबाजी और मतभेद सामने आए थे, जिससे गठबंधन की स्थिति कमजोर हो गई थी।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 13 Jun 2026, 11:34 AM IST

Tejashwi Yadav and Rahul Gandhi

तेजस्वी यादव और राहुल गांधी (Photo-ANI)

Bihar Politics: दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में बिहार को लेकर एक खास रणनीति तैयार की गई है। इस योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव को सौंपी गई है। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर मतभेद माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का एक धड़ा तेजस्वी यादव को अपना नेता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जिससे इस रणनीति को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है।

इसके बावजूद महागठबंधन की बैठक में यह तय हुआ है कि सरकार के खिलाफ लड़ाई में तेजस्वी यादव को कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलेगा, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ेगी। बिहार में किन मुद्दों पर आंदोलन, धरना और प्रदर्शन करना है, यह सभी निर्णय राज्य स्तर पर तेजस्वी यादव और स्थानीय नेताओं की संयुक्त बैठक में लिए जाएंगे।

महागठबंधन में फिर एकजुटता की कोशिश तेज

बिहार में महागठबंधन विधानसभा चुनाव के बाद टूट की कगार पर पहुंच गया था, लेकिन अब इसे फिर से एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा था कि इंडिया गठबंधन केवल चुनाव तक के लिए था, जबकि तेजस्वी यादव ने इसे लोकसभा चुनाव तक सीमित बताया था। इस बयानबाजी के चलते दोनों दलों के बीच मतभेद की स्थिति बन गई थी।

हालांकि, अब इन मतभेदों को कम करने और महागठबंधन को मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। तय किया गया है कि सरकार के फैसलों के खिलाफ और जनता के मुद्दों को लेकर सभी घटक दल मिलकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही हर महीने बिहार महागठबंधन के नेताओं की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।

दीपंकर भट्टाचार्य ने बैठक के बाद बताया कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन मुख्य फोकस आपसी दूरी को कम करने पर रहा। ढाई से तीन घंटे चली बैठक में यह सहमति बनी कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर विपक्ष को एकजुट होना है। साथ ही क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस से अपील की कि वह देश की बड़ी पार्टी होने के नाते बड़ा दिल दिखाए और सहयोगी दलों के साथ मिलकर आगे बढ़े।