
राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (फोटो- Tejashwi yadav X)
Tejashwi Yadav on EO Murder Case: डेहरी नगर पालिका के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) विमल कुमार की हुई हत्या के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने पुलिस जांच की दिशा और सरकार के इरादों पर सवाल उठाए हैं और इस घटना को राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का उदाहरण बताया है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस जल्दबाजी में बिना निष्पक्ष जांच या फोरेंसिक विश्लेषण किए और बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किए ड्राइवर को मुख्य आरोपी बनाकर असली साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक को बचाने के लिए सारा दोष ड्राइवर पर मढ़ा जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया पक्षपाती रहा है। उन्होंने पुलिस के इस दावे को पूरी तरह बेतुका बताया कि ड्राइवर ने काम के ज्यादा दबाव और छुट्टी न मिलने की वजह से अफसर की हत्या कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर छुट्टी न मिलने पर किसी सिक्योरिटी गार्ड या कर्मचारी ने ऐसा कोई बड़ा कदम उठाया होता, तो क्या IG रैंक का कोई अफसर इतना गैर जिम्मेदाराना बयान देता?
ड्राइवर के बदलते बयानों की ओर इशारा करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि ड्राइवर ने पहले हमलावरों के दो अपाचे मोटरसाइकिलों पर आने की बात कही, बाद में सिर्फ एक बाइक होने की बात मानी और आखिर में अचानक खुद हत्या करने की बात कबूल कर ली। ये विरोधाभास साफ तौर पर बताते हैं कि पुलिस असली मास्टरमाइंड को बचाने के लिए ड्राइवर को बलि का बकरा बना रही है।
मृत अफसर के परिवार का हवाल देते हुए तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक पर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि अफसर की पत्नी बबीता देवी, उनकी मां और बहनें गहरे सदमे में हैं और बार-बार सत्ताधारी पार्टी के MLA का नाम ले रही हैं। आरोप है कि MLA सोनू सिंह अफसर को रोज फोन करके 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की रंगदारी मांगते थे और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते थे। तेजस्वी ने कहा कि MLA के दबाव के कारण अफसर लगातार मानसिक तनाव में थे और घटना से ठीक एक दिन पहले ही MLA से मिले थे। परिवार के बार-बार MLA का नाम लेने के बावजूद, पुलिस इस पहलू की जांच करने से बच रही है।
पुलिस के कामकाज की आलोचना करते हुए तेजस्वी ने कहा कि निष्पक्ष जांच न करके, बिहार पुलिस सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 199 का उल्लंघन कर रही है। यह धारा उन जांच अधिकारियों पर लागू होती है जो गंभीर मामलों में पारदर्शी जांच करने या नियमों का पालन करने में नाकाम रहते हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस निष्क्रियता के पीछे एक सीनियर रेंज अफसर के उस MLA और राज्य के शीर्ष नेतृत्व के साथ करीबी संबंध हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि FIR में MLA का नाम साफ तौर पर होने के बावजूद कोई आपराधिक मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया।
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि 100 दिनों के भीतर बिहार में दूसरे कार्यकारी अधिकारी की हत्या उस सरकार की प्रतिष्ठा पर एक दाग है जो बड़े-बड़े दावे करती है। उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के लापरवाह रवैये ने प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल पूरी तरह से तोड़ दिया है, जबकि अपराधी बेखौफ हो गए हैं। तेजस्वी ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग विपक्ष के आवास और सुरक्षा छीनने, बुलडोजर की कार्रवाई करने और जाति व धर्म के आधार पर समूहों को निशाना बनाने में व्यस्त हैं।
इस बीच, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने तेजस्वी यादव के आरोपों का जवाब दिया है। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि इस हत्या को किसी राजनीतिक साजिश से जोड़ना पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हत्यारा कोई बाहरी व्यक्ति या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि अधिकारी का अपना निजी ड्राइवर था। मंत्री ने बताया कि ड्राइवर पिछले दो वर्षों से उनके साथ काम कर रहा था और उनके बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंध थे। विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और इस मुद्दे में सरकार को बेवजह घसीटना अनुचित है।
Updated on:
04 Aug 2026 07:53 pm
Published on:
04 Aug 2026 07:46 pm
