
मेटा पर बड़े एक्शन की तैयारी (Patrika File Photo)
Nishikant Dubey on Meta: BJP सांसद और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने टेक कंपनी मेटा और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इन प्लेटफॉर्म पर 'लोकतंत्र-विरोधी' और 'व्यवस्था-विरोधी' नैरेटिव को बढ़ावा देने वाले एल्गोरिदम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टेक कंपनियां भारतीय कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करने में नाकाम रहती हैं, तो IT एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें मिली कानूनी 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस ले ली जाएगी।
कमिटी की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए निशिकांत दुबे ने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों और उभरते सोशल मीडिया कैंपेन के व्यूअरशिप आंकड़े पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो संगठन और बयान आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड भी नहीं हैं, उन्हें मुख्यधारा की मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से ज्यादा प्रमोशन मिल रहा है। पिछले हफ्ते के व्यूअरशिप डेटा का हवाला देते हुए दुबे ने सवाल उठाया कि कैसे अभिजीत दिपके द्वारा शुरू की गई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आरक्षण-विरोधी कंटेंट को रातों-रात लाखों व्यूज मिल रहे थे, जबकि बड़ी राजनीतिक पार्टियों के आधिकारिक कंटेंट की पहुंच को दबाया जा रहा था।
निशिकांत दुबे ने जो आंकड़ें बताएं उसके अनुसार
यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें वे पेपर लीक के खिलाफ संदेश दे रहे थे। इस वीडियो को रात 12:30 बजे से सुबह 5:30 बजे के बीच फेसबुक से हटा दिया गया था। संसदीय समिति ने तकनीकी खराबी के बारे में मेटा की सफाई को नाकाफी माना। निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा ने खुद माना है कि प्रधानमंत्री का कंटेंट पांच घंटे तक गायब रहा। अगर प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है, तो इससे गंभीर बात और क्या हो सकती है? यह देश को अस्थिर करने की कोशिश की ओर इशारा करता है। निचले स्तर के अधिकारियों का सिर्फ खेद जताना काफी नहीं होगा। मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग को खुद सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
निशिकांत दुबे ने बताया कि बैठक में समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM), महिलाओं की आपत्तिजनक AI-जनरेटेड फोटो-वीडियो और अश्लील कंटेंट को तुरंत हटाने में नाकाम रहे हैं। दुबे ने आरोप लगाया कि ये कंपनियां VPN के जरिए यूजर का डेटा भी छिपाती हैं, जिन पर भारत में प्रतिबंध है। साथ ही, उन्होंने बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद पुलिस के जरिए FIR दर्ज कराई है, जिसका मकसद ऐसे फेक वीडियो और कंटेंट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना है।
निशिकांत दुबे ने बताया कि जब 2000 में IT एक्ट लागू हुआ था, तो BSNL, MTNL और Airtel जैसी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) कंपनियों के लिए 'सेफ हार्बर' प्रावधान (धारा 79) बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि यूजर्स द्वारा इंटरनेट के गलत इस्तेमाल के लिए नेटवर्क प्रोवाइडर्स को कानूनी मुश्किलों का सामना न करना पड़े। बाद में मेटा, गूगल, यूट्यूब और X जैसी सोशल मीडिया कंपनियां आईं और उन्होंने भी इसी सुरक्षा कवच का फायदा उठाना जारी रखा।
निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश की है कि अगर ये टेक कंपनियां देश-विरोधी ताकतों को बढ़ावा देती हैं, अश्लील कंटेंट या बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री हटाने में नाकाम रहती हैं या भारत के संप्रभु नेतृत्व का अनादर करती हैं, तो उन्हें दी गई कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर प्रोटेक्शन) पूरी तरह से वापस ले ली जानी चाहिए।
Updated on:
04 Aug 2026 05:44 pm
Published on:
04 Aug 2026 05:40 pm
