
भगवंत मान। फोटो- आईएएनएस
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को देशभर में ई-20 पेट्रोल के अनिवार्य इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार से इसे तत्काल स्थगित कर व्यापक समीक्षा करने की मांग की। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन के ई-20 ईंधन लागू किया गया है, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भगवंत मान ने विधानसभा में कहा कि ई-20 पेट्रोल को साल 2030 तक लागू करने की योजना थी, लेकिन इसे 2025 में ही लागू कर दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसके लिए विशेषज्ञों की सिफारिश और पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं तो इसे इतनी जल्दी क्यों लागू किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई अध्ययन नहीं है, जिससे यह साबित हो कि ई-20 पेट्रोल सभी वाहनों के इंजन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि जिन इंजनों को ई-10 ईंधन के हिसाब से तैयार किया गया था, उन्हें अचानक ई-20 पर चलाने की स्थिति पैदा कर दी गई। मान ने दावा किया कि देशभर में इस फैसले को लेकर वाहन मालिकों में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि एक सर्वे में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी और इंजन संबंधी समस्याओं की शिकायत की है। उन्होंने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने ई-20 पेट्रोल और सामान्य पेट्रोल में से उपभोक्ताओं को विकल्प देने की मांग भी उठाई। साथ ही कहा कि ई-20 ईंधन की कीमत कम की जानी चाहिए ताकि इसका अतिरिक्त भार वाहन मालिकों पर नहीं पड़े। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यूएस ट्रेड डील के तहत भारत को 100 बिलियन डॉलर का सामान खरीदना होगा। इस वक्त अमेरिका सबसे बड़ा इथेनॉल प्रोड्यूसर है। ऐसे में वह इसे भारत को ही बेचेगा।
वहीं दूसरी तरफ विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि जब तक वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा और राज्यों से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक ई-20 पेट्रोल को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य हैं, लेकिन ऐसी नीतियों को वैज्ञानिक आधार, पारदर्शिता और राज्यों एवं आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में कहा गया कि देश, विशेषकर पंजाब में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं, जो ई-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन या प्रमाणित नहीं हैं। ऐसे वाहनों में ई-20 के अनिवार्य उपयोग से इंजन की कार्यक्षमता, ईंधन प्रणाली के पुर्जों की आयु, माइलेज, रखरखाव खर्च, वारंटी विवाद और वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार ई-20 से संबंधित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अध्ययन सार्वजनिक करे तथा यदि अनिवार्य उपयोग के कारण किसी उपभोक्ता को वाहन संबंधी नुकसान या आर्थिक हानि होती है तो उसके लिए उचित मुआवजा व्यवस्था लागू की जाये। विधानसभा ने प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री तथा नीति आयोग के उपाध्यक्ष को भेजने का भी निर्णय लिया।
Updated on:
04 Aug 2026 05:52 pm
Published on:
04 Aug 2026 05:52 pm
