
Bihar Police Recruitment 2023: बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, ED के पटना जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ये संपत्तियां मामले के आरोपी कौशिक कुमार कर की एक कंपनी एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं।
बता दें कि ईडी ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। एजेंसी के मुताबिक, जांच में पेपर छपाई का ठेका हासिल करने से लेकर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने और रकम को अलग-अलग कंपनियों के जरिए छिपाने तक की साजिश सामने आई है।
ED की जांच बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला टेलीग्राम लिंक, मोबाइल नंबर और बैंक खातों के जरिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने से जुड़ा है। EOU की 22 अगस्त 2024 को दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, Blessings Secured Press Pvt Ltd के मालिक कौशिक कुमार कर ने प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल करने के लिए साजिश रची थी। ED का आरोप है कि उसने अपनी सहयोगी कंपनी Caltex Multiventures Pvt Ltd के जरिए यह ठेका हासिल किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, Caltex Multiventures के पास पहले से प्रिंटिंग का अनुभव और अपना प्रिंटिंग प्रेस नहीं था। इसके बावजूद बिहार केंद्रीय चयन पर्षद ने उसे परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका दे दिया। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए Blessings Secured Press की वास्तविक भूमिका छिपाई गई। इस कंपनी को पहले भी परीक्षा पेपर लीक के मामलों में शामिल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
ED के मुताबिक, कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 के प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए जा रहे थे। इसी दौरान अन्य आरोपियों की मिलीभगत से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए गए। पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इससे बिहार सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ और परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी असर पड़ा।
ED की जांच में सामने आया कि Caltex Multiventures को प्रश्नपत्र छपाई के ठेके के लिए 5.9 करोड़ रुपये एडवांस मिले थे। आरोप है कि कंपनी ने इस रकम का केवल एक हिस्सा ही Blessings Secured Press को दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, कुल 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेजे गए। इन कंपनियों का कोई वास्तविक कारोबारी कामकाज नहीं था। कथित तौर पर फर्जी लेनदेन के जरिए रकम की असली पहचान और स्रोत छिपाने की कोशिश की गई।
ED ने बताया कि कौशिक कुमार कर ने Blessings Secured Press पर लगी पाबंदियों से बचने के लिए Caltex Multiventures नाम से नई कंपनी बनाई थी। इसमें अपने सहयोगियों को डमी डायरेक्टर के तौर पर रखा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि अपराध से अर्जित रकम को कोलकाता स्थित कई शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया। बाद में रकम को नकदी में बदल दिया गया, जिससे उसका आगे का मनी ट्रेल पता लगाना मुश्किल हो गया।
ED के मुताबिक, अपराध से अर्जित पूरी रकम का पता नहीं चल पाने के कारण अब तक चिन्हित 2.01 करोड़ रुपये के बराबर मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। ये संपत्तियां NC Print Pvt Ltd के नाम पर हैं, जिसे एजेंसी ने कौशिक कुमार कर के नियंत्रण वाली कंपनी बताया है। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है।