बिहार विधानसभा चुनाव 2025: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की बिहार चुनाव 2025 में हार के बाद पूर्व सहयोगी अफजल आलम ने टिकट वितरण में गड़बड़ी, फेवरिटिज्म, कमजोर प्रबंधन, स्थानीय मुद्दों की समझ की कमी और टीम पर अत्यधिक काम के दबाव को हार की बड़ी वजह बताया। अफजल करीब 15 महीने तक पार्टी के साथ जुड़े रहे थे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए पीके ने चुनाव प्रबंधन और प्रचार अभियान में विशेषज्ञों की बड़ी टीम लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद पार्टी बिहार में अपना खाता तक नहीं खोल सकी।
प्रशांत किशोर की टीम में काम कर चुके अफजल आलम ने फेसबुक पोस्ट के जरिए हार के नौ प्रमुख कारण गिनाए हैं। उन्होंने दावा किया कि फेवरिटिज्म, युवा प्रतिभाओं और स्थानीय नेताओं की अनदेखी, कमजोर टीम प्रबंधन और स्थानीय समझ की कमी जन सुराज की शर्मनाक हार की बड़ी वजह बनी। अफजल के मुताबिक, अगर इन कमियों को समय रहते दूर किया जाता, तो पार्टी का प्रदर्शन कहीं बेहतर हो सकता था।
अफजल आलम अप्रैल 2024 में प्रशांत किशोर की टीम से जुड़े थे। वे डिजिटल कम्युनिकेशन टीम का हिस्सा थे और पदयात्रा के दौरान भी पीके के साथ ग्राउंड स्तर पर सक्रिय रूप से काम करते रहे। करीब 15 महीने तक उन्होंने चुनावी अभियान में पार्टी के साथ काम किया।
अफजल आलम ने जन सुराज पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में टिकट वितरण के दौरान नए और ईमानदार चेहरों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, जिससे कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसाधनों का अनावश्यक इस्तेमाल किया गया, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उनके मुताबिक, जमीन से जुड़े कई मुद्दों की सही और सटीक समझ नहीं होने के कारण पार्टी की रणनीति हवा-हवाई साबित हुई।
अफजल आलम ने आरोप लगाया कि टीम पर बेवजह अत्यधिक काम का दबाव डाला गया। दिनभर फील्ड में काम कराने के बाद देर रात तक कर्मचारियों से लगातार काम लिया जाता था, जिससे टीम पर मानसिक दबाव बढ़ता गया। उनके मुताबिक, कमजोर कार्यप्रबंधन भी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज की हार की एक बड़ी वजह बना। हालांकि, अफजल ने चुनाव से पहले ही अगस्त 2025 में जन सुराज से इस्तीफा दे दिया था।
1.टीम की राय और युवा टेलेंट की अनदेखी की गई
2.प्रतिभा के अनुसार टीम में जिम्मेदारी नहीं दी गई
3.टीम पर बेवजह अत्यधिक काम का बोझ
4.सीनियर्स में असुरक्षा और अनुचित व्यवहार
5.फेवर्टिजम और अत्यधिक सैलरी
6.समझ रखने वाले स्थानीय लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं देना
7.सही उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया गया
8.टीम प्रबंधन और HR भूमिका गड़बड़
9.एक ही काम कई टीमों से करवाया गया